प्रदेश में 3 हजार से ज्यादा थैलेसीमिया मरीज हैं, इनमें से सिर्फ 850 को ही प्रमाण पत्र जारी किए गए हैं। ऐसे ही हीमोफीलिया के एक हजार मरीजों में से 400 को ही प्रमाण पत्र मिले हैं।
प्रदेश के हीमोफीलिया और थैलेसीमिया रोगियों को जल्द ही दिव्यांग प्रमाण पत्र मिलेगा। स्वास्थ्य मंत्री परसादी लाल मीणा ने इसके लिए राज्य में 'मेरा प्रमाण पत्र-मेरा सम्मान' नवाचार करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने बताया कि राज्य में 3 हजार से ज्यादा थैलेसीमिया मरीज हैं। अब तक 850 रोगियों को ही दिव्यांग प्रमाण पत्र जारी किए गए हैं। हीमोफीलिया के एक हजार मरीजों में से 400 मरीजों को ही प्रमाण पत्र मिले हैं। उन्होंने कहा कि दोनों बीमारियों से पीड़ित मरीजों को जल्द से जल्द प्रमाण पत्र उपलब्ध कराने के लिए यह अनूठा प्रयोग किया जा रहा है।
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राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के निदेशक डॉ. जितेंद्र कुमार सोनी ने बताया सभी मेडिकल कॉलेजों के अधीक्षकों को 10 फरवरी तक दोनों बीमारियों के मरीजों को प्रमाण पत्र दिलाने के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि सरकार की मंशा है कि ज्यादा से ज्यादा मरीजों को केंद्र और राज्य सरकार द्वारा दी जा रही सुविधाओं का लाभ मिल सके इसके लिए यह नवाचार शुरू किया गया है।
इस तरह बनवा सकते हैं प्रमाण पत्र
डॉ. सोनी ने कहा कि प्रत्येक गुरुवार को संभाग स्तरीय मेडिकल कॉलेज स्तर पर विशेष रूप से थैलेसीमिया और हीमोफीलिया मरीजों की जांच कर पात्र व्यक्ति के लिए प्रमाण पत्र की जारी करने के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि कोई भी पात्र व्यक्ति ई मित्र के जरिए भी आवेदन कर सकता है। ईमित्र के जरिए किया गया आवेदन बीसीएमओ, पीएमओ के पास जाएगा। वहां से आवेदन अग्रेसित होकर जांच उपरांत प्रमाण पत्र कर दिया जाएगा।