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राजस्थान: लोमड़ी के शिकार के बाद सात गोडावण की आजादी पर रोकी, प्रॉटोकॉल पर फिर से विचार

Wed, 21 Oct 2026 04:42 PM IST
प्रतीक पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जैसलमेर

सार

जैसलमेर के डेजर्ट नेशनल पार्क में छोड़े गए छह महीने के नर गोडावण का रेगिस्तानी लोमड़ी ने शिकार कर लिया। घटना के बाद वन विभाग और भारतीय वन्यजीव संस्थान ने सुरक्षा प्रोटोकॉल की समीक्षा शुरू कर दी है।
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जंगल में छोड़े गए गोडावण की तस्वीर - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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डेजर्ट नेशनल पार्क में कृत्रिम परिवेश में पाले गए सात अन्य गोडावण पक्षियों की जंगल में रिहाई फिलहाल रोक दी गई है। पार्क के सम क्षेत्र में हाल ही में छोड़े गए छह महीने के एक नर गोडावण चूजे का रेगिस्तानी लोमड़ी ने शिकार कर लिया। इस दुर्घटना के बाद भारतीय वन्यजीव संस्थान के वैज्ञानिकों और वन विभाग ने रीवाइल्डिंग सुरक्षा उपायों व प्रोटोकॉल की नए सिरे से समीक्षा शुरू कर दी है। अब संरक्षात्मक व्यवस्था की पूरी पड़ताल करने के बाद ही वन विभाग शेष पक्षियों को खुले वातावरण में छोड़ेगा।
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रीवाइल्डिंग प्रोटोकॉल की समीक्षा और रिहाई पर रोक
डेजर्ट नेशनल पार्क में ग्रेट इंडियन बस्टर्ड यानी गोडावण की आबादी को पुनर्जीवित करने के लिए एक प्रायोगिक रीवाइल्डिंग कार्यक्रम चलाया जा रहा है। इस योजना के पहले चरण के तहत लगभग छह महीने की उम्र वाले 11 कैप्टिव-ब्रेड गोडावणों को जंगल में मुक्त करने के लिए चिह्नित किया गया था। इस कार्यक्रम की शुरुआत गत चार अक्तूबर को केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने जैसलमेर के सूडासरी रिलीज साइट पर दो सैटेलाइट-टैग किए गए नर पक्षियों को रिहा करके की थी। इसके बाद पिछले बुधवार को दो और नर गोडावणों को प्राकृतिक वातावरण में छोड़ा गया था।

हालांकि, बुधवार को छोड़े गए दो पक्षियों में से एक नर गोडावण प्राकृतिक शिकार का शिकार बन गया। इस हादसे के बाद वैज्ञानिकों ने अन्य सात पक्षियों को जंगल में भेजने का फैसला टाल दिया है। अधिकारियों का कहना है कि जब तक सुरक्षा प्रोटोकॉल की समीक्षा पूरी नहीं हो जाती और सभी संभावित खतरों का आकलन नहीं हो जाता, तब तक सात अन्य गोडावणों को कैप्टिव वातावरण में ही रखा जाएगा।
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वॉटर होल पर हमला और सैटेलाइट ट्रैकिंग अलर्ट
वन अधिकारियों के अनुसार यह हादसा उस समय हुआ जब छह महीने का गोडावण प्राकृतिक जलस्रोत यानी वॉटर होल के पास मौजूद था। वहां पहले से घात लगाकर बैठी एक रेगिस्तानी लोमड़ी ने अचानक उस पर हमला कर दिया। सम स्थित गोडावण प्रजनन केंद्र के कंट्रोल रूम में तैनात भारतीय वन्यजीव संस्थान के वैज्ञानिकों और वन विभाग के अधिकारियों को सैटेलाइट ट्रैकिंग डिवाइस के माध्यम से तुरंत अलर्ट मिला।

सिग्नल मिलते ही वन विभाग और वैज्ञानिकों की टीम तुरंत मौके पर पहुंची। जब तक टीम वहां पहुंची, तब तक पक्षी का शिकार हो चुका था और केवल उसके अवशेष व पंख बिखरे मिले। लोमड़ी शिकार के बाद वहां से भाग चुकी थी। जांच दल ने घटनास्थल से खून के नमूने एकत्र किए और पक्षी पर लगा सैटेलाइट ट्रैकिंग उपकरण सुरक्षित बरामद कर लिया।

तीन पक्षी सुरक्षित और वैज्ञानिकों का संकल्प
जंगल में छोड़े गए तीन अन्य गोडावण पूरी तरह सुरक्षित हैं। ये पक्षी पार्क क्षेत्र में स्वच्छंद विचरण कर रहे हैं और इनकी हर गतिविधि पर सैटेलाइट से लगातार नजर रखी जा रही है। वन अधिकारियों का मानना है कि रेगिस्तानी लोमड़ी जैसे शिकारी जीव इस पारिस्थितिकी तंत्र का ही स्वाभाविक हिस्सा हैं। इस वजह से कड़े सुरक्षा प्रबंधों और गश्त के बावजूद ऐसी घटनाएं प्राकृतिक रूप से घटित हो जाती हैं।
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