राजस्थान सरकार ने सरकारी स्कूलों में नौवीं कक्षा की छात्राओं को मिलने वाली नि:शुल्क साइकिल योजना के नियमों में बड़ा बदलाव किया है। अब इस योजना का लाभ केवल राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम से जुड़े परिवारों की बेटियों को ही मिलेगा। शिक्षा विभाग के इस प्रस्ताव को मंजूरी मिलने से करीब 90 हजार यानी 28 प्रतिशत छात्राएं साइकिल योजना के लाभ से वंचित हो सकती हैं। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अशोक गहलोत ने इस निर्णय पर नाराजगी जताते हुए राज्य सरकार पर हमला बोला है।
साइकिल योजना का दायरा घटा, बजट में भी कटौती
राज्य सरकार ने साइकिल योजना का दायरा सीमित करने के साथ इसके बजट में 40 करोड़ रुपये की कटौती भी की है। इसके अलावा मेधावी छात्राओं को दिए जाने वाले पुरस्कार में भी बदलाव किया गया है।
स्कूटी हटाई, पुरस्कार राशि भी हुई कम
इंदिरा प्रियदर्शिनी पुरस्कार का नाम बदलकर पद्माक्षी पुरस्कार किया गया है। इसके तहत 12वीं कक्षा की छात्राओं को पहले एक लाख रुपये और स्कूटी दी जाती थी। अब पुरस्कार राशि घटाकर 75 हजार रुपये कर दी गई है और स्कूटी का प्रावधान हटा दिया गया है।
शिक्षकों के सम्मान में भी बड़ी कटौती
सरकार ने शिक्षकों को दिए जाने वाले सम्मान की संख्या में भी कटौती की है। पहले 1,374 शिक्षकों को सम्मानित किया जाता था, जिसे घटाकर अब 189 कर दिया गया है। इन बदलावों को लेकर शिक्षा क्षेत्र में सरकार की प्राथमिकताओं पर सवाल उठाए जा रहे हैं।
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बेटियों की योजनाओं पर क्यों चली कैंची?'
पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने सोशल मीडिया पर कहा कि बेटियों की शिक्षा को लेकर कांग्रेस और भाजपा की नीयत में बड़ा अंतर है। उन्होंने कहा कि पिछली कांग्रेस सरकार ने बेटियों की एलकेजी से पीजी तक की शिक्षा मुफ्त की थी।
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कांग्रेस सरकार की योजनाएं गिनाईं
गहलोत ने कहा कि कालीबाई भील योजना के तहत स्कूटी पाने वाली बालिकाओं की संख्या 20 हजार से बढ़ाकर 30 हजार की गई थी। पांच वर्षों में 132 नए बालिका कॉलेज खोले गए थे। उन्होंने सवाल किया कि भाजपा सरकार बेटियों को स्कूल लाने वाली योजनाओं पर ही कटौती क्यों कर रही है।