राजस्थान में लगातार हो रही नेटबंदी को लेकर भाजपा नेता जितेंद्र गोठवाल ने मुख्यमंत्री अशोक गहलोत पर हमला बोला है। उन्होंने कहा, कश्मीर में अगर इंटरनेट बंद हो जाए तो सीएम गहलोत गला फाड़-फाड़ कर चिल्लाते हैं । लेकिन राजस्थान में उनके राज में नेटबंदी आम हो गई है।
उन्होंने कहा कि परीक्षा हो तो नेट बंद, पुलिस तंत्र फेल हो जाए तो नेट बंद, अपराधी अपराध कर भाग जाए तो नेट बंद कर दिया जाता है। 1975 में इंदिरा गांधी सरकार द्वारा लगाए गए आपातकाल में भी मौलिक अधिकार छीना गया था। आम आदमी सरकार के खिलाफ न कुछ बोल सकता था और न लिख सकता था। देश अदृश्य जेल में था। आम आदमी के सारे अधिकार निलंबित कर दिए गए थे।
गोठवाल ने कहा कि, 47 साल बाद राजस्थान में भी वैसा ही माहौल है। नेट बंद कर गहलोत सरकार राजस्थान वासियों को डिजिटल कैद में बंद कर देती है। राजस्थान में देश में सबसे ज्यादा इंटरनेट बंद होता है। प्रदेश सरकार अगर इंटरनेट को फंडामेंटल राइट (मौलिक अधिकार) नहीं मानती तो उसे सुप्रीम कोर्ट की जनवरी 2020 में की गई टिप्पणी दोबारा पढ़नी चाहिए। जिसमें कहा गया है कि इंटरनेट संविधान के अनुच्छेद-19 के तहत लोगों का मौलिक अधिकार है। यानि यह जीने के हक जैसा ही जरूरी है। इंटरनेट को अनिश्चितकाल के लिए बंद नहीं किया जा सकता।
उन्होंने कहा, भरतपुर की पांच तहसीलों में संतों के आंदोलन से घबराकर कांग्रेस सरकार ने नेट बंद कर दिया। भादरा उपखंड में गौकशी की घटना के बाद सरकार ने नेट बंद कर दिया। गहलोत जी नेट बंद करने से न अपराध बंद होते और न अपराधी में खौफ आता है। आपको नेट बंदी करने के बजाए अपनी कार्यशैली सुधारनी चाहिए। आज कल अपराधियों में आत्मविश्वास बढ़ता जा रहा है और आमजन में भय व्याप्त हो रहा है।