पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव का बिगुल बज चुका है। मध्य प्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़, तेलंगाना और मिजोरम में चुनाव तारीखों का एलान हो गया है। इसी के साथ इन राज्यों में चुनावी गहमागहमी का दौर और तेज हो गया है।
पांच राज्यों में विधानसभा चुनावों की तारीख की घोषणा हो चुकी है। इसके साथी ही चुनाव लड़ने के इच्छुकों में टिकट पाने की होड़ मच गई है। राजस्थान में भी कांग्रेस और बीजेपी की टिकट पाने को लेकर गहमागहमी शुरू हो गई है। साथी ही दोनों राजनीतिक पार्टियों के भीतर भी उठापटक तेज हो गई है। दोनों दलों में पार्टी के दिग्गज ज्यादा से ज्यादा टिकट अपने खेमे के लोगों को दिलाने में जुटे हैं।
राहुल तय करेंगे किसे मिलेगा टिकट
जयपुर में मंगलवार को कांग्रेस की चुनाव प्रबंधन समिति की बैठक हुई। इस बैठक में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सचिन पायलट, स्क्रीनिंग कमेटी की प्रमुख कुमारी शैलजा और कांग्रेस महासचिव अशोक गहलोत ने शिरकत की। बैठक के बाद पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा कि टिकट योग्य लोगों को मिलेगा और जरूरत पड़ेगी तो टिकट के इच्छुकों को बुलाकर व्यक्तिगत रूप से बात की जाएगी। इसके बाद ही टिकट तय होगा। मुख्यमंत्री कौन बनेगा? इस सवाल के जवाब में गहलोत ने कहा कि चुनाव के बाद निर्वाचित विधायक मुख्यमंत्री तय करेंगे और उनके फैसले पर अंतिम मुहर आलाकमान की होगी।
चुनाव प्रबंधन समिति की बैठक के बाद स्क्रीनिंग कमेटी की प्रमुख कुमारी शैलजा ने पत्रकार वार्ता में कहा कि चुनाव समिति की बैठक में टिकट बंटवारे पर अंतिम मुहर पार्टी अध्यक्ष राहुल गांधी की होगी।
वसुंधरा के टिकट बांटने पर असमंजस बरकरार
भाजपा के भीतर भी कुछ ऐसा ही घमासान मचा हुआ है। हालांकि वहां यह असमंज बरकरार है कि इस बार टिकट बंटवारा मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के हाथों में होगा या फिर भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह करेंगे।
हालांकि मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने चुनाव प्रचार समिति की बैठक के दौरान इशारों-इशारों में यह स्पष्ट कर दिया कि टिकट वही बांटेंगी। अगर ऐसा नहीं हुआ तो भाजपा राजस्थान में चुनाव हार सकती है।
दूसरी तरफ अमित शाह का खेमा ये समझाने में लगा है कि इस बार राजस्थान में टिकट बंटवारा केंद्रीय स्तर पर होना चाहिए, जिससे ज्यादा से ज्यादा विधायकों का टिकट काटा जा सके। शाह का मानना है कि मौजूदा विधायकों का टिकट काट नए उम्मीदवार को मौका दिए जाने से जनता की नाराजगी थोड़ी कम हो जाएगी।