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राजस्थान: 70 से ज्यादा सीटों पर बागी बने मुसीबत, कल मतदाता तय करेंगे सरकार किसकी

Thu, 06 Dec 2018 09:48 AM IST
समीर शर्मा, जयपुर
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बीजेपी, कांग्रेस
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राजस्थान में विधानसभा चुनाव के लिए प्रचार बुधवार को थम गया। मतदान 7 दिसंबर को होगा। इस बार भी बसपा सहित छोटी पार्टियों और निर्दलियों ने मुकाबला रोचक बना दिया है। इनमें दोनों ही दलों के कई बागी भी हैं। बिना किसी लहर और मुद्दे वाले इस चुनाव में पांच दर्जन सीटों पर त्रिकोणीय व दर्जन भर सीटों पर चतुष्कोणीय मुकाबले ने किसी भी एक पार्टी को बहुमत मिलने को लेकर संशय खड़ा कर दिया है। हमेशा की तरह दो मुख्य पार्टियों- भाजपा और कांग्रेस के बीच दंगल 170-180 सीटों पर ही रहने की उम्मीद है। पिछले पांच चुनावों को देखें, तो भाजपा और कांग्रेस से छोटी पार्टियों व निर्दलियों ने 14 से लेकर 28 सीटें तक छीनी हैं। 

जाट समुदाय का रुख क्या होगा?

इस बार भी कांग्रेस और भाजपा के बागियों ने बतौर निर्दलीय प्रत्याशी बनकर और बसपा व अन्य दलों के प्रत्याशियों ने मिलकर करीब 60 सीटों पर मुकाबले को त्रिकोणीय बना दिया है। वहीं, 12 सीटों पर चतुष्कोणीय मुकाबले के चलते अंदाजा लगाना भी मुश्किल हो रहा है कि कौन जीतेगा। राजस्थान में सबसे बड़े करीब 12 प्रतिशत से अधिक का वोट बैंक माने जाने वाले जाट समाज के नेता हनुमान बेनिवाल की राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी बनने से इस समाज के रुख को राजनीतिक विश्लेषक नहीं समझ पा रहे।

जब निर्दलीय विधायक बने सरकार की संजीवनी

प्रदेश में 200 विधानसभा सीटें हैं, लेकिन अलवर की रामगढ़ सीट पर बसपा प्रत्याशी लक्ष्मण चौधरी के निधन के बाद चुनाव स्थगित होने से अब 199 सीटों पर वोटिंग होगी। इनमें से दोनों प्रमुख पार्टियों के बागियों ने 30-30 सीटों पर समीकरण बिगाड़ रखे हैं। वर्ष 2008 में कांग्रेस जब 96 सीटों पर अटक गई थी और सरकार बनाने के लिए 100 का आंकड़ा पार करना था, तो मंत्री पद का प्रस्ताव देकर बसपा के सभी 6 विधायकों को कांग्रेस में शामिल किया गया था। इसी तरह का वाकया वर्ष 1993 में हुआ था, जब भाजपा 96 सीटें ही जीत पाई थी, तो चार निर्दलियों को मंत्री पद आदि का राजनीतिक लाभ देकर भाजपा ने सरकार बनाई थी और भैरोंसिंह शेखावात मुख्यमंत्री बने थे। 

चुनाव भाजपा कांग्रेस बसपा अन्य निर्लदलीय
2013 163 21 3 6 7
2008 78 96 6 6 14
2003 120 56 2 9 13
1998 33 150 2 5 7
1993 96 76 0 7 21

 

 

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भाजपा के मंत्री और कांग्रेस के पूर्व मंत्री तक बागी

BJP- Congress

भाजपा : टिकट कटने से नाराज वसुंधरा राजे सरकार के मंत्री सुरेंद्र गोयल ने जैतारण से, राजकुमार रिणवा ने रतनगढ़ से, ओमप्रकाश हुड़ला ने महुवा और धनसिंह रावत ने बांसवाड़ा विधानसभा सीट से निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में भाजपा को चुनौती दी हुई है। विधायक अनिता कटारा, देवेंद्र कटारा, नवनीत लाल निनामा, किशनाराम नाई व गीता वर्मा भी निर्दलीय मैदान में हैं।

कांग्रेस : पूर्व केंद्रीय मंत्री महादेव सिंह खंडेला ने खंडेला से, दुष्कर्म केस में फंसे राजस्थान के पूर्व मंत्री बाबूलाल नागर ने दूदू से, पूर्व मंत्री रामकेश मीणा ने गंगापुर सिटी से और पूर्व विधायकों में संयम लोढ़ा ने सिरोही से, पूर्व डिप्टी सीएम कमला बेनीवाल के बेटे आलोक बेनीवाल ने शाहपुरा से व विक्त्रस्म सिंह शेखावत ने जयपुर की विद्याधर नगर सीट से निर्दलीय खड़े होकर कांग्रेस के लिए मुश्किल खड़ी की हुई है। 

अन्य : भाजपा से रूठकर अलग हुए वरिष्ठ नेता व विधायक घनश्याम तिवाड़ी ने भारत वाहिनी पार्टी से जयपुर की सांगानेर सीट से मजबूत उपस्थिति दर्ज करवाई हुई है। इसके अलावा रालोपा से विधायक हनुमान बेनीवाल ने खींवसर से, स्पर्धा चौधरी ने फुलेरा से ताल ठोकी हुई है।
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