राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने बृहस्पतिवार को कहा कि राज्य में पड़ रहे केंद्रीय एजेंसियों के छापों से वे घबराने वाले नहीं हैं और न ही उनका मिशन रुकेगा। गहलोत ने एक सवाल के जवाब में जयपुर में संवाददाताओं से कहा कि इन छापों से न हम घबराने वाले हैं न हमारा मिशन रुकने वाला है। भाजपा की नीतियां व कार्यक्रम हो या सिद्धांत देश का बर्बाद करने वाले हैं। ये फासीवादी लोग हैं, लोकतंत्र की हत्या कर रहे हैं।
गहलोत ने गुरुवार को राज्यपाल कलराज मिश्र से मुलाकात की। गहलोत ने इसे औपचारिक मुलाकात बताया। बता दें कि राज्य में जारी सियासी घमासान के दौरान गहलोत की राज्यपाल से यह तीसरी मुलाकात थी।
गहलोत ने कहा, हमारे पास पूरा बहुमत है। उसी बहुमत के आधार पर सदन में जाएंगे और बहुमत साबित करके दिखाएंगे। विधानसभा का सत्र बुलाए जाने के बारे में गहलोत ने कहा,'विधानसभा का सत्र जल्दी ही होगा। बहुमत हमारे साथ में है, पूरे कांग्रेस विधायक एकजुट हैं और कोर्ट में जो लोग गए हैं, जिन्होंने गलती की है, जो भटक गए हैं, वो लोग कोर्ट में गए हैं।'
गहलोत ने कहा कि अदालत में चल रहे मामले का दल बदल विरोधी कानून से कोई संबंध नहीं है 'हमारे पास पूरा बहुमत भी है, हम एकजुट हैं, तभी यहां बैठे हुए हैं।' उन्होंने उम्मीद जताई कि असंतुष्ट सचिन पायलट खेमे के कुछ विधायक भी सदन में उनका साथ देंगे।
वहीं, प्रधानमंत्री को लिखे गए इस पत्र को लेकर गहलोत ने कहा, 'मैंने प्रधानमंत्री को पत्र इसलिए लिखा था क्योंकि यह लोकतंत्र है। मैंने यह पत्र इसलिए लिखा था जिससे वह यह न कहें कि उनके पास इस घटनाक्रम की जानकारी नहीं थी या उनके लोगों ने उन्हें अपर्याप्त जानकारी दी। मैंने इसे इसलिए लिखा जिससे अगर मैं उनसे मिलूं तो वह यह न कह सकें कि उन्हें इसके बारे में पता नहीं था।'
गहलोत ने कहा, अगर उन्हें लगता है कि उन्हें राजस्थान सरकार पर भरोसा नहीं है, तो वह ऑडियो टेप को वॉइस टेस्ट के लिए अमेरिका में एफएसएल एजेंसी को भेज सकते हैं। उन्हें आगे आना चाहिए और वॉइस टेस्ट कराना चाहिए। केंद्रीय मंत्री, विधायक, सांसद भाषण देते हैं, इसलिए सभी को पता होता है कि यह उनकी आवाज है। फिर भी उनकी पहली प्रतिक्रिया यही रहती है कि 'यह मेरी आवाज नहीं है'।
बता दें कि राजस्थान में जारी राजनीतिक उठापटक के बीच मुख्यमंत्री गहलोत ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर यह बताया था कि राज्य में कांग्रेस की चुनी गई सरकार को गिराने की कोशिश हो रही है। गहलोत ने इस पत्र में प्रधानमंत्री का ध्यान लोकतांत्रिक मर्यादाओं के खिलाफ विधायकों की खरीद फरोख्त के जरिए सरकार गिराने की कोशिशों की ओर आकर्षित किया था।
गहलोत ने पत्र में लिखा था कि कोरोना वायरस वैश्विक महामारी के इस दौर में जीवन रक्षा ही हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। ऐसे में राजस्थान में चुनी हुई सरकार को गिराने का कुप्रयास किया जा रहा है। इस कृत्य में केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत, भाजपा के अन्य नेता व हमारे दल के कुछ अति महत्वाकांक्षी नेता भी शामिल हैं।' गहलोत ने इन कोशिशों को जनता का अपमान करार दिया था।
वहीं, गहलोत के इस पत्र को लेकर राजस्थान में भाजपा के अध्यक्ष सतीश पूनिया ने बुधवार को कहा था कि मुख्यमंत्री अशोक गहलोत द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लिखे पत्र से यह स्पष्ट हो गया है कि उनकी सरकार अल्पमत में है। उन्होंने कहा, गहलोत द्वारा प्रधानमंत्री को लिखे पत्र से यह स्पष्ट हो गया है कि सरकार अल्पमत में है और अस्तित्व बचाने की कोशिश कर रही है।