गणतंत्र दिवस के मौके पर राज्य के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने पीसीसी में मीडिया से बात की। उन्होंने कहा कि आज का दिन हमारे लिए एक नया उत्साह और नई उमंग लेकर आता है। कांग्रेस ने महात्मा गांधी के सानिध्य और पंडित नेहरू, सरदार पटेल, मौलाना अबुल कलाम आजाद और आंबेडकर साहब ने जो संविधान बनाया उसे आज 75 वर्ष पूरे हो गए हैं। यह सफर तय करते-करते आज हम कहां से कहां आ गए हैं, फिर भी हमारे देश के कुछ नेता उस इतिहास को नकार रहे हैं, इससे बुरी बात हमारे लिए और क्या हो सकती है?
सीएम ने कहा कि गणतंत्र दिवस हमें पुरानी बातें याद दिलाता है, एक संकल्प लेने का वक्त देता है कि आने वाले समय में हम लोग संविधान को और मजबूत करें। आज देश में ऐसा माहौल बन गया है कि आने वाले समय में क्या होगा यह किसी को नहीं पता। देश में ज्यूडिशियरी सहित तमाम एजेंसियों दबाव में हैं। अशांति, अविश्वास और तनाव का माहौल है। हम बार-बार कहते हैं कि प्रेम-मोहब्बत-भाईचारा-सद्भाव होना चाहिए आपस में, देशवासियों में, सभी धर्म, सभी जातियों के लोगों में, जिससे हम लोग और मजबूत हो सकें।
अब पढ़िए सीएम से किए गए सवाल और उनके जवाब...
सवाल- नेता पार्टी छोड़कर क्यों जा रहे हैं?
जवाब- देश के अंदर कांग्रेस एक आंदोलन की तरह है, 135 साल का लंबा इतिहास है। इसमें पहले भी कई बड़े-बड़े लोग गए, लेकिन उनको पार्टी में वापस आना पड़ा। मैं उन लोगों के नाम क्या लूं, देश जानता है। कांग्रेस एक मात्र पार्टी है जो पूरे देश में और हर गांव और घर में है। अन्य पार्टियां सत्ता में तो हैं, लेकिन उन्हें कोई पूछता नहीं है, नॉर्थ-ईस्ट और दक्षिण के राज्यों में भाजपा का कोई जनाधार नहीं है। कोई अगर कांग्रेस छोड़कर जाता है तो कोई फर्क नहीं पड़ता है, जाए उसका भी स्वागत, आए उसका स्वागत है।
सवाल- अभी जो हालात हैं उस पर आप क्या कहेंगे?
जवाब- भाजपा की केंद्र और राज्य सरकारें पूरी तरह फेल हो रही हैं। जनता उद्वेलित है, इनके कारनामों को समझ रही है। असहमति व्यक्त करने वालों को जेल भेजा जा रहा है। जबकि लोकतंत्र में तो असहमति और आलोचना का भी स्वागत करना चाहिए। देश की जनता इन्हें समझ रही है, टाइम आने पर सबक सिखाएगी।
सवाल- गुलाम नबी आजाद को लेकर चल रहीं चर्चाओं पर क्या कहेंगे?
जवाब- चर्चाएं तो चलती रहेंगी, भाजपा की सोच और अप्रोच क्या है वो सबके सामने आ रही है। देश में महंगाई, बेरोजगारी सहित जरूरी मुद्दों की भाजपा सरकार को चिंता नहीं है, उन पर बता नहीं होती है। किसान करीब एक साल से ज्यादा समय के लिए सड़क पर बैठे रहे, लेकिन उनकी फ्रिक नहीं की गई। सरकार में आने से पहले 2014 में जो वादे किए गए थे उन्हें कोई याद नहीं करता, लेकिन जनता सब समझ रही है।
सवाल- किसानों की जमीनें नीलाम होने से रोकने वाले बिल पर क्या कहेंगे?
जवाब- पांच एकड़ तक का कुर्की नहीं हो इसके लिए हमने सिविल प्रोसीजर कोड में संशोधन कर बिल गवर्नर साहब को भेजा है। अब गवर्नर साहब उसे केंद्र को भेजेंगे। अगर केंद्र सरकार उसे मान लेगी तो संशोधन हो जाएगा। उसके बाद में किसानों की 5 एकड़ तक की जमीन कुर्क नहीं होगी। विधेयक के नाम को लेकर जो कहा गया है तो वह नाम नहीं होगा, पर बिल विधानसभा के अंदर पास हुआ है वो तो रिकॉर्ड के अंदर है। सरकार उस पर आज भी कायम है और आगे भी रहेगी। सरकार की मंशा यही है कि किसानों की पांच एकड़ तक की जमीन कुर्क न हो।