राजस्थान सरकार में चल रही अंतर्कलह को लेकर भाजपा प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनिया ने सीएम अशोक गहलोत पर हमला बोला है। उन्होंने कहा, मुख्यमंत्री गहलोत ने ऐसे विधायक को मंत्री बनाया है, जो खेल करवाने से ही दबाव में आ रहा है। यह हंसी और दुर्भाग्य की बात है। जब कोई विधायक मंत्री पद की शपथ लेता है तो जलालत की बात कहां से आई? शपथ के दौरान इस बात को मंत्री ने ध्यान में रखा होगा।
उन्होंने कहा, दूसरा पक्ष ब्यूरोक्रेसी का है। अशोक गहलोत अपने नेताओं और कार्यकर्ताओं पर कम और नौकरशाही पर ज्यादा भरोसा करते हैं। ये अंदरुनी विरोध कांग्रेस सरकार में अक्सर देखने को मिलता है, लेकिन खेल मंत्री ने जो ट्वीट किया है, वह सरकार में अंदरूनी विरोध और आंतरिक राजनीति का उदाहरण है। पिछले साढ़े तीन साल में कांग्रेस के कई विधायक अपनी दर्द जाहिर कर चुके हैं।
पूनिया ने कहा, मुख्यमंत्री कह रहे हैं कि हमने राजस्थान की कायापलट कर दी है। कांग्रेस को दोबारा जिंदा कर देंगे। पार्टी को नए संकल्प के साथ खड़ा कर देंगे। उसी समय मुख्यमंत्री यह भी कह रहे हैं कि खेल मंत्री ग्रामीण ओलंपिक करवा रहे हैं, इसलिए दबाव में हैं। यह बड़ी विचित्र बात है। उन्होंने कहा, ऐसे दबाव वाले आदमी को मंत्री पद पर रखना ही नहीं चाहिए, जो सरकार और प्रदेश का नुकसान कर दे।
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष पूनिया ने कहा, कांग्रेस सरकार के अंदर झगड़े और अंतर्कलह के कारण कांग्रेस के विधायकों को 42 दिन तक बाड़े में बंद रहना पड़ा। पीसीसी चीफ और डिप्टी सीएम को बर्खास्त करना पड़ा। उसके बाद ऐसा लगता था कि कांग्रेस में सब कुछ ठीक हो जाएगा, लेकिन आंतरिक झगड़े की फेहरिस्त लंबी है। कभी विधायक भरत सिंह चिट्ठी लिखते हैं, कभी रामलाल मीणा, गणेश घोघरा तो कभी बिधूड़ी बयान देते हैं। कांग्रेस के भीतर असंतोष की सुगबुगाहट ऐसी है, जैसे धुआं दिखता है, लेकिन अंदर कहीं न कहीं आग है।
पूनिया ने कहा, कांग्रेस का चिंतन शिविर दिखावा था। उससे पार्टी को फायदा नहीं हुआ। शिविर में राहुल गांधी को नेतृत्व देने का फैसला किया गया था। मैं उसका इंतजार कर रहा हूं। राहुल को कांग्रेस का नेतृत्व जितना जल्दी दिया जाएगा, देश को उतना ज्यादा मनोरंजन का मौका मिलेगा।