राजस्थान विधानसभा चुनाव ने प्रदेश में कांग्रेस की वापसी कराई है। 99 सीटें पाकर कांग्रेस ने पांच साल बाद सरकार बदलने का तिलिस्म बरकरार रखा है। कई सीटों पर भाजपा की हार नई है। कृषि मंत्री, राजस्व मंत्री, शहरी विकास मंत्री सहित कई बड़े मंत्री अपनी सीट नहीं बचा पाए। इन्हीं में शामिल हैं देश के इकलौते गौ मंत्री ओटाराम देवासी जिन्हें उनकी सीट पर एक निर्दलीय ने पटखनी दी है।
बतौर गौ मंत्री विवादों से भरा रहा कार्यकाल
पुलिस कर्मी से राजनेता बने देवासी को 2015 में देश का पहला गौ मंत्रालय संभालने का जिम्मा दिया गया था। उनके कार्यकाल के दौरान राजस्थान के हिंगोनिया गौशाला में 2016 से 2017 के बीच हजारों गायों की मौत हुई थी। इसके अलावा इसी साल अगस्त में भादरा कस्बे की एक प्रमुख गौशाला में केवल दो दिन में 28 से ज्यादा गायों की मौत हो गई थी। यह सब तब हुआ जब देवासी ने राज्य में आवारा घूम रहीं गायों के लिए फंड इकट्ठा करने को नई प्रॉपर्टी खरीदने वालों पर 'गाय कर' के रूप में 20 फीसदी सरचार्ज लगाने का फैसला किया था। राजस्थान में गौ हत्या को लेकर पहले से ही कठोर कानून है। दोषी पाए जाने पर 10 साल तक की जेल हो सकती है।
निर्दलीय प्रत्याशी ने दी पटखनी
हमेशा पारंपरिक कपड़ों में रहने वाले देवासी 2013 में भी सिरोही विधानसभा से जीते थे। इस बार निर्दलीय उम्मीदवार संयम लोढ़ा ने उन्हें 10 हजार वोट से हरा दिया। देवासी को 71,019 वोट मिले, जबकि लोढ़ा ने 81,272 वोट हासिल कर जीत अपने नाम कर ली।
भीड़ हत्या की घटनाओं ने कराई किरकिरी
प्रदेश में बीफ को लेकर कई हिस्सों में हिंसक घटनाएं हुई। गौरक्षा के नाम पर इन हिंसक घटनाओं पर सरकार रोक लगाने में नाकाम रही। पिछले साल अलवर में हिंसक भीड़ ने गाय को डेयरी ले जा रहे मुस्लिम युवक की हत्या कर दी थी। भीड़ का आरोप था वह युवक गौ हत्या के लिए इन गायों को ले जा रहा था। गायों की दुर्दशा और गौ ह्त्या के नाम पर हुई हिंसक घटनाओं को देवासी की हार की वजहों के रूप में देखा जा रहा है।