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पास में एक रुपया नहीं, मनरेगा मजदूर हैं लेकिन जुनून ऐसा कि 24वीं बार उतरे चुनावी मैदान में

Wed, 21 Nov 2018 12:06 PM IST
चुनाव डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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तीतर सिंह - फोटो : AMAR UJALA
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राजस्थान के रण में करनपुर से 70 साल के तीतर सिंह 24वीं बार चुनाव लड़ रहे हैं। हैरान करने वाली बात तो यह है कि पेशे से मनरेगा मजदूर तीतर सिंह के पास एक रूपये की संपत्ति नही है। लेकिन इस बार भी करनपुर विधानसभा सीट से चुनाव लड़ रहे हैं। इस बार लोगों के दान किए पैसों से चुनाव लड़ रहे । उनकी इच्छा है कि कम से कम एक बार उन्हे जीत मिले । 

गंगानगर जिले की विधानसभा से हैं प्रत्याशी

तीतर सिंह राजस्थान के गंगानगर जिले के रहने वाले हैं। सिंह इससे पहले 23 चुनाव बार लड़ चुके हैं। उन्होंने अपने नामांकन पत्र में बताया कि उनके पास एक भी पैसा नहीं है। उनकी जिद के आगे घरवालों ने भी घुटने टेक दिए और उनका समर्थन कर रहे हैं। गुलाबेवाला गांव के तीतर सिंह मनरेगा योजना के तहत मजदूरी कर हर दिन 142 रूपये कमाते है। तीतर सिंह ने अपना नांमाकन 13 नवंबर को करनपुर विधानसभा सीट से किया। 

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वह 24वीं बार राज्य मे चुनाव लड़ रहे हैं। नामांकन पत्र भरते समय उन्होंने चल-अचल संपत्ति वाले और आपराधिक पृष्ठभूमि वाले कॉलम में कुछ नहीं लिखा है। तीतर सिंह 9 बार लोकसभा चुनाव और 9 बार विधानसभा चुनाव के साथ ही पंचायत और नगर निगम स्तर के चुनाव में भी अपनी किस्मत आजमा चुके हैं। 

चुनाव जीतने का जुनून 

तीतर सिंह के नाती गगनदीप ने कहा कि मेरे नाना के अंदर चुनाव जीतने का जुनून है, इसलिए तो 23 बार चुनाव हार कर भी वह इस बार चुनाव के मैदान में उतरे हैं। वह एक बार जीत जाएं इसलिए बार-बार चुनाव लड़ते हैं। गगनदीप ने बताया कि वह हरियाणा के सिरसा में 12वीं का छात्र है और अपने नाना के समर्थन में प्रचार करने राजस्थान आया है। 

बेटे भी मजदूरी करते हैं 

अपने नाना की भाषा का अनुवाद करके गगनदीप ने कहा कि लोग हमें दान देंगे और जिससे हम चुनाव लड़ेंगे। तीतर सिंह के दो बेटे हैं - अकबर सिंह और रशपाल सिंह। तीतर की पत्नी गुलाब कौर उनकी जिद्द के आगे झुककर उनका सर्मथन करती है। अकबर सिंह ने कहा कि वो और उनका  भाई खुद एक कृषि मजदूर हैं जो  मनरेगा में मजदूरी करते हैं। उन्होंने कहा कि वे किसी तरह से  मजदूरी और खेती का काम कर अपने घर खर्च चला पाते हैं। 

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