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गहलोत और पायलट दोनों को चुनाव लड़वाने के पीछे कांग्रेस की ये रणनीति तो नहीं? 

Wed, 14 Nov 2018 02:12 PM IST
चुनाव डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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राजस्थान चुनाव
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राजस्थान विधानसभा चुनाव में कांग्रेस और भाजपा दोनों अपनी अपनी मुश्किलों से जूझ रही है। यहां हर रोज नई खबर सुनने को मिल रही है। भाजपा जहां इस बार सत्ता विरोधी रुझान से लड़ रही है, वहीं कांग्रेस में भी कम दिक्कतें नहीं हैं। कांग्रेस की सबसे बड़ी दिक्कत सीएम उम्मीदवार को लेकर है।  
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सीएम पद का पेच

चुनाव में इस बार कांग्रेस की हवा बनी हुई है, तो जाहिर है कि सीएम उम्मीदवारी पर पेच भी ज्यादा है। कांग्रेस महासचिव अशोक गहलोत और राजस्थान कांग्रेस अध्यक्ष सचिन पायलट के चुनाव लड़ने के एलान ने इसे और उलझा दिया है। आज गहलोत ने साफ कर दिया कि वह और सचिन पायलट दोनों ही चुनाव लड़ेंगे। यानि कांग्रेस को बहुमत मिलने कि स्थिति में कांग्रेस में अंदरुनी घमासान और बढ़ सकता है।

इन दोनों नेताओं के चुनाव लड़ने का मतलब यही लगाया जा सकता है कि आखिरी क्षण तक सीएम पद की उम्मीदवारी पर सस्पेंस कायम रहेगा। गहलोत अपनी परंपरागत सीट जोधपुर के सरदारपुरा से लड़ते हैं और यहां उनकी जीत तय मानी जा रही है। सचिन पायलट अजमेर से लोकसभा चुनाव लड़ते रहे हैं। हालांकि 2014 में वह हार गए थे। इस बार राहुल गांधी ने उन्हें विधानसभा चुनाव की बड़ी जिम्मेदारी सौंपी है। वह अजमेर की दौसा सीट से लड़ सकते हैं और उनकी जीत में किसी को संदेह भी नहीं होगा। 
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कांग्रेस की रणनीति 

इस नई सियासी तस्वीर को कांग्रेस नई रणनीति के तौर पर भी देखा जा सकता है। दरअसल, कांग्रेस चुनाव के समय गहलोत और पायलट किसी को भी नाराज नहीं करना चाहती। इसके साथ ही कांग्रेस 2008 की स्थिति से भी बचना चाहती है। क्योंकि 2008 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने सी पी जोशी को मुख्यमंत्री पद का चेहरा बनाया था और वह एक वोट से हार गए थे। सीएम पद के चेहरे का हारना कांग्रेस के लिए मुश्किल खड़ी कर गया। इसके बाद पार्टी ने गहलोत को सीएम बनाया। अब पार्टी दोनों को आगे बढ़ाएगी जिससे 2008 वाली स्थिति आ जाए तो सीएम के चेहरे को लेकर दिक्कत खड़ी न हो। 

लेकिन इसमें एक पेच भी है। अगर दोनों ही जीतकर विधानसभा पहुंचते हैं तो सीएम पद की दावेदारी किसकी होगी? यही सवाल कांग्रेस हाईकमान के मन में भी होगा। राहुल गांधी ने जिस तरह गहलोत को नई जिम्मेदारी सौंपी है उसके बाद वह बहुत ताकतवर बनकर उभरे हैं। उनके मुकाबले राजनीति में कम अनुभवी सचिन पायलट कैसे सीएम पद की दौड़ में टिक पाएंगे ये बड़ा सवाल है।  
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