राजस्थान में नामांकन की प्रक्रिया समाप्त होने के बाद अब अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद् (एबीवीपी) और नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया (एनएसयूआई ) ने चुनाव प्रचार का मोर्चा संभाल लिया है। दोनों ही छात्र संघों ने अपनी संरक्षक पार्टी को सत्ता पर काबिज करने के लिए संपर्क अभियान की शुरुआत की है।
एबीवीपी के छात्र नेता भाजपा के प्रचार के लिए डोर-टू-डोर कैंपेन कर रहे हैं। युवाओं से संपर्क स्थापित करने के लिए कॉलेज और अन्य शिक्षण संस्थान इनके केंद्र में हैं। युवाओं से मिलकर यह उन्हें वोट करने के लिए प्रोत्साहित करने के साथ-साथ, नोटा का इस्तेमाल नहीं करने की भी अपील कर रहे हैं। एबीवीपी के सदस्य ग्रामीण इलाकों में जाकर महिलाओं और युवाओं को इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) के इस्तेमाल के विषय में बता रहे हैं।
कांग्रेस की छात्र इकाई एनएसयूआई भी जमकर प्रचार कर रही है। इसके सदस्य भाजपा सरकार के अधूरे वादों की सूची बनाकर लोगों के बीच जा रहे हैं। इसके अलावा अधूरे वादों के पर्चे जनता में बांट रहे हैं। एनएसयूआई के कार्यकर्ता बेरोजगारी और संस्थाओं के नाम बदलने के मुद्दे जो जनता के बीच उठा रही है। वरिष्ठ नेताओं के प्रचार वाले क्षेत्रों में एनएसयूआई युवा मतदाताओं के लिए विशेष सेमिनार के आयोजन करने पर भी विचार कर रही है। चुनिंदा यूनिवर्सिटी और कॉलेजों में इन सेमिनारों को आयोजित करने का कार्यक्रम है।
प्रदेश में सभी 200 सीटों पर 7 दिसंबर को मतदान होना है। चुनाव के नतीजे 11 दिसंबर को बाकी चारों राज्यों के नतीजों के साथ सामने आएंगे।