राजस्थान में गेहूं के टोकन की लाइन में खड़े किसान के चक्कर खाकर गिरने के बाद मौत की खबर सामने आई है। लेकिन प्रशासन ने इसे सामान्य मौत बताया है। अब इस मामले में सियास भी शुरू हो गई है। स्थानीय विधायक ने इसे लेकर राज्य सरकार पर आरोप लगाते हुए जांच की मांग की है। वहीं स्थानीय लोगों का कहना है कि जब सभी मंडियों को टोकन मुक्त किया गया है तो फिर यहां क्यों टोकन दिए जा रहे हैं।
यह मामला छबड़ा क्षेत्र के निपानिया गांव का है। यहां बुधवार को परोलिया गांव का रहने वाले किसान अमृतलाल मीणा (55) की मौत हुई। अमृतलाल के भाई मोहनलाल मीणा ने बताया कि बुधवार को निपानिया में नीलामी के गेहूं के टोकन वितरित होने थे। इसके लिए भाई अमृतलाल मंगलवार रात को ही टोकन लेने के लिए पहुंच गया था।
उन्होंने आरोप लगाया कि टोकन की लाइन में खड़ा अमृतलाल बुधवार सुबह 10 बजे गश खाकर गिर पड़ा और अस्पताल में उपचार के लिए ले जाने पर डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। मामले में भाजपा के क्षेत्रीय विधायक प्रतापसिंह सिंघवी ने राज्य सरकार से निष्पक्ष जांच और मृतक किसान के परिवार को सहायता देने की मांग की है।
वहीं भाजपा देहात के अध्यक्ष अशोक गौड़ ने आरोप लगाया है कि जब जिले की मंडियों को टोकन मुक्त किया गया है तो निपानिया में टोकन क्यों बांटे जा रहे थे। उन्होंने भी किसान की मृत्यु लाइन में लगने पर तेज गर्मी के चलते गश खाकर गिरने से होने का आरोप लगाया। इसके अलावा अन्य ग्रामीणों ने भी कहा कि टोकन लेने के लिए रात से ही किसान पहुंचना शुरू ही गए थे और बुधवार सुबह भारी भीड़ लगने से अव्यवस्था फैल गई थी। इस दौरान धक्का-मुक्की भी हुई।
स्थानीय तहसीलदार दिलीप सिंह प्रजापति ने कहा कि प्रशासनिक लापरवाही के आरोप सही नहीं हैं। मृतक की तबीयत उसके घर पर दोपहर को बिगड़ी थी। सुबह साढ़े नौ बजे ही उसे टोकन दे दिया गया था तथा सभी कूपन 10 बजे तक पटवारी ने वितरित कर दिए थे। सीआई रामानंद यादव ने बताया कि इस मामले में थाने में रिपोर्ट दर्ज नहीं हुई, उन्हें भी एक किसान की टोकन की लाइन में लगने से अचानक गिरकर मृत्यु की घटना के बारे में पता चला है।