राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की ओर से बुधवार को विवाह को लेकर की गई एक बजट घोषणा चर्चा का विषय रही। गहलोत ने कहा कि सामान्य वर्ग के युवक-युवती की ओर से अनुसूचित जाति में विवाह करने पर पांच लाख रुपए भेंट किए जाएंगे।
इस घोषणा को कुछ महंत शास्त्र के विपरीत मानते हैं, तो अनुसूचित जाति के नेता इस घोषणा का गलत इस्तेमाल करने की आशंका जता रहे हैं। हालांकि दोनों यह जरूर मानते हैं कि सरकार की भावनाएं जातिवाद समाप्त करने की हैं।
इस मुद्दे पर महंत पुरुषोत्तम भारती का कहना है कि यह घोषणा भले ही जातिवाद को समाप्त करने के लिए की गई होगी, लेकिन शास्त्रों के हिसाब से यह कतई उचित नहीं है।
वे कहते हैं कि शास्त्रों में लिखा है कि अंतर जाति विवाह करने पर संतानें वर्ण संकर रूप में पैदा होती हैं। माता पिता के अलग-अलग वंश से होने के कारण इन संतानों के भीतर अंश में अंतर रहता है। इसलिए सजातीय विवाह ही होने चाहिए, जिससे इस तरह के अंतर संतानों में नहीं हों।
इधर, राष्ट्रीय मीणा युवा महासभा के अध्यक्ष राजपाल मीणा ने कहा कि सरकार की मंशा जातिवाद समाप्त करने की है, जो उचित है, लेकिन इस घोषणा का गलत इस्तेमाल होने की आशंका है। इस योजना की शर्तें सख्त होनी चाहिए।
यदि शादी के बाद जोड़ा अलग हो जाता है, इस राशि की वसूली के भी प्रावधान होने चाहिए। सही रहेगा कि सरकार इस योजना में ऐसे विवाह होने पर युवक-युवतियों के आजीवन रहने की शर्त भी डाले।