राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा, विधायकों ने जो हमारा साथ दिया है, चाहे वो निर्दलीय, सीपीएम और बीटीपी के थे वह हम लोग कभी भूल नहीं सकते। अगर, सरकार बची तो हम इन्हीं के कारण बची है। अब उनका टैस्ट हो चुका है। राज्यसभा चुनाव में हमें पूरे 126 वोट मिले, राष्ट्रपति चुनाव में दो विधायक बीमार थे वह वोट देने नहीं आए, हमारे दो वोट गए हैं।
हमें तो उम्मीद थी कि ज्यादा जाएंगे, क्योंकि मुद्दा ही ऐसा था। यह लड़ाई विचारधारा की थी, व्यक्तिगत नहीं थी कि राष्ट्रपति कौन बने। हमें मालूम था कि कौन बनेगा, सबको मालूम था, मुझे तो उम्मीद थी कि 8-10 वोट भी जा सकते हैं, फिर भी एकजुट रहे, इसके मायने हैं कि हर विधायक चाहता है कि जनता में संदेश रहे कि राजस्थान में कांग्रेस के साथ सारे विधायक एकजुट हैं।
गहलोत ने कहा, बीएसपी के लोग हमारे साथ आए, निर्दलीय, सीपीएम और बीटीपी भी हमारा साथ दे रही है। सरकार स्थिर रहे यह इसलिए साथ रहे हैं। हमने कोई हॉर्स ट्रेडिंग की नहीं यह इतिहास गवाह है। देश के अंदर राजस्थान पहला राज्य है जहां पर बिना हॉर्स ट्रेडिंग बीएसपी के पूरे विधायकों कांग्रेस में आ गए।
हिंदुस्तान के इतिहास में कहीं ऐसा नहीं हुआ जो यहां हुआ है। हमारा पूरा कुनबा एकजुट है। हम चुनाव में एकजुट होकर जाएंगे। हम चाहते हैं कि चुनाव में इस बार जनता विचार करे कि जो कांग्रेस ने शानदार काम किया है। हमने जो योजनाएं दी हैं जनता को हर चीज में, किसानों, मजदूरों, युवाओं, छात्रों, स्वास्थ्य सेवाओं और सोशल सिक्योरिटी में कोई कमी नहीं रखी है। ऐसे में हम उम्मीद करते हैं कि इस बार लोग सरकार रिपीट करें।
सरकार रिपीट करने के बहुत सारे फायदे होते हैं। रिपीट नहीं की तो आज रिफाइनरी का 40 हजार करोड़ का प्रोजेक्ट था, वह 70 हजार करोड़ का हो गया है। ईआरसीपी वसुंधराजी की बनाई हुई योजना है, हमने सरकार बनते ही एक दिन नहीं रोका, काम को आगे बढ़ाया है। उसके लिए 9 हजार 600 करोड़ रुपए रख दिए, सिर्फ इसलिए कि योजना टाइम में पूरी हो। अगर यह योजना 10 साल लेट हो गई तो 38 हजार करोड़ की योजना 70 हजार की बन जाएगी। हम इन बातों का ध्यान रख रहे हैं। अब देखते हैं कि जनता क्या मूड रखती है। जनता ही माई-बाप होती है।
वसुंधरा हाईकमान से डर गईं
ईआरसीपी पर हुई सर्व दालिए बैठक को लेकर मुख्यमंत्री गहलोत ने कहा, भाजपा के लोगों को भी आना चाहिए। हमने उनसे पूछकर ही बैठक बुलाई थी। कल उन्होंने कहा था कि हम आएंगे, वसुंधराजी भी आ रही थीं। आज खबर है कि वह नहीं आ रही हैं। हम रिसर्च कर रहे हैं कि इसमें क्या राज है, मैं जा रहा हूं, देखता हूं, अगर आएंगी तो हम उस ढंग से आपसे बात करेंगे, नहीं आएंगी तो हम उस ढंग से बात करेंगे। यह इतना बड़ा मुद्दा है, वसुंधराजी के समय में यह योजना शुरू हुई है, तो क्या दबाव पड़ा उनके ऊपर हाईकमान का उनके कि कल उन्होंने ओके किया, आज मना कर रही हैं। जबकि उनको योजना का हर पहलू मालूम है। अगर वह आतीं तो पक्ष-विपक्ष मिलकर ऐसी स्थिति लाते जिससे केंद्र पर दबाव बनता। वसुंधरा जी या तो डर गई होंगी या हाईकमान का डंडा पड़ा होगा। कुछ बात हुई दिखती है, इसलिए ही वह नहीं आ रही हैं।