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विधानसभा में राजेंद्र राठौड़ के खिलाफ विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव पर हंगामा, स्पीकर ने राजेंद्र राठौड़ को फटकारा

Tue, 31 Jan 2023 04:45 PM IST
नीरज शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर

सार

राजस्थान विधानसभा सदन में मंगलवार को विपक्ष के उपनेता राजेंद्र राठौड़ के खिलाफ विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव लाने के मुद्दे पर जमकर हंगामा हुआ। राजेंद्र राठौड़ और स्पीकर सीपी जोशी में इस दौरान तर्क-वितर्क भी हुए। 
 
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उपनेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़ के खिलाफ विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव पर हंगामा हुआ। - फोटो : अमर उजाला डिजिटल
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विस्तार
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राजस्थान विधानसभा सदन में मंगलवार को सिरोही से निर्दलीय विधायक और सीएम के सलाहकार संयम लोढ़ा की ओर से उपनेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़ के खिलाफ विशेषाधिकार हनन का प्रस्ताव लाए जाने पर सदन में जोरदार हंगामा हुआ।  करीब 20 मिनट तक सदन में हंगामा चला। सीएम गहलोत समर्थित विधायकों की ओर से 25 सितंबर को विधानसभा अध्यक्ष को उनके निवास पर सौंपे गए इस्तीफे के मुद्दे को राजेंद्र राठौड़ की ओर से हाईकोर्ट में जनहित याचिका के रूप में ले जाने पर विधायक संयम लोढ़ा ने विशेषाधिकार हनन का प्रस्ताव लगाया है।
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हमें भी बोलने का मौका दें- राजेंद्र राठौड़

बीजेपी के सीनियर विधायक और उपनेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़ ने सदन में विधानसभा अध्यक्ष डॉ सीपी जोशी से कहा कि आप सीधे विशेषाधिकार हनन का प्रस्ताव उठाने की अनुमति विधायक को दे रहे हैं। इस मुद्दे पर हमें भी बोलने का मौका दिया जाना चाहिए। विधानसभा के नियम और प्रक्रिया के नियम 160 और 161 को भी देखा जाए। जब राजेंद्र राठौड़ ने विशेषाधिकार हनन का प्रस्ताव लाने के प्रॉसेस पर नियम कोट करने की बात सदन में बोली, तो विधानसभाध्यक्ष डॉ सीपी जोशी ने उन्हें टोकते हुए कहा कि आपको मंजूरी नहीं दे सकते हैं। 


नियमों के हिसाब से ही सदन चलेगा, मैंने परमिशन दी

विधानसभा अध्यक्ष डॉ सीपी जोशी ने राजेंद्र राठौड़ से कहा- मैंने विधायक को प्रस्ताव पर बोलने की अनुमति दी है, आपको अनुमति नहीं दी है। ये मेरा अधिकार है। आप मुझे डिक्टेट नहीं कर सकते हैं। सीपी जोशी ने कहा- आप मेरे अधिकार को चैलेंज नहीं कर सकते। हाउस नियमों से चलता है और आप वरिष्ठ हैं, तो इसका मतलब यह नहीं कि आपके हिसाब से सदन चलाया जाए।
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मैं अनपढ़ नहीं हूँ, सारे नियम जानता हूं- सीपी जोशी

 राजेंद्र राठौड़ ने जब नियमों का हवाला दिया तो विधानसभाध्यक्ष जोशी बोले- मैं अनपढ़ नहीं हूं, मैं सारे नियम जानता हूं। इन नियमों के हिसाब से ही सदन चलेगा। आपके कहने से सदन नहीं चलेगा। जब राजेंद्र राठौड़ ने नियम 161 का हवाला देते हुए उसे पढ़ने की बात कही, तो जोशी बोले- आप सीधे 161 पर जंप कर रहे हैं। मैं अभी वहां तक पहुंचा ही नहीं हूं। कंगारू जंपिंग से काम नहीं चलता है।  पहले नियम 160 को देखें, इसे मैं ही पढ़ देता हूं। मिस्टर राठौड़ हाफ लिटरेट होने से काम नहीं चलता है, पूरा पढ़ना होता है। जब बीजेपी विधायक बोलने लगे, तो विधानसभा अध्यक्ष ने कहा- अकेले राठौड़ ही काफी हैं, उन्हें कोई असिस्टेंट की जरूरत नहीं है। वो अपनी पैरवी कर सकते हैं।

आप सत्तापक्ष की अंदरूनी लड़ाई को ढक नहीं सकते- राठौड़

राजेंद्र राठौड़ ने विधानसभा अध्यक्ष से कहा-ऐसा करके आप सत्तापक्ष की अंदरूनी लड़ाई को ढक नहीं सकते हैं। 13 फरवरी को हाईकोर्ट में इस मामले पर सुनवाई होगी और फैसला आने वाला है।  आप विशेषाधिकार पर टुकड़ों में फैसला करके क्या साबित करना चाहते हैं? ऐसा कभी नहीं हुआ। विशेषाधिकार हनन पर टुकड़ों में फैसला नहीं किया जा सकता है। 

अभी तो मैंने केवल विशेषाधिकार हनन पर बोलने का मौका दिया-जोशी

विधानसभा अध्यक्ष जोशी ने कहा-  मुझे सदन में पूरा अधिकार है। नियम 160 में भी प्रोविजन है कि विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव की मैं अनुमति दे सकता हूं।  नियम 157 के तहत विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव लाने का पूरा प्रोसेस दिया हुआ है। मुझे अधिकार है कि मैं इन नियमों के तहत बोलने की अनुमति दे सकता हूं। इन्हीं नियमों के तहत मैंने संयम लोढ़ा को बोलने की अनुमति दी है।अगर इसके बाद आपको कोई आपत्ति है, तो आपको बोलने की अनुमति होगी। लेकिन आज तो हम बहस करवा नहीं रहे हैं। इसका एक पूरा प्रोसेस है, अभी तो मैंने केवल विशेषाधिकार हनन पर बोलने का मौका दिया है। आपको आपत्ति है तो आपको भी बहस के वक्त बोलने का मौका दिया जाएगा। लेकिन अभी आपको परमिशन नहीं है और अलाऊ नहीं किया गया है। विधानसभाध्यक्ष जोशी ने कहा- काफी लोगों को पता नहीं है कि विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव कैसे लाया जाता है। राजेंद्र राठौड़ कहते हैं वैसे विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव नहीं आता है। इसलिए मैंने विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव को अनुमति दी है, इस पर आगे बहस होगी। तो सबको बोलने का वक्त मिलेगा।

हाईकोर्ट इस विधानसभा को कैसे डिक्टेट कर सकता है? 

सीएम सलाहकार और निर्दलीय विधायक संयम लोढ़ा ने सदन में कहा- क्या इस सदन में बैठकर क्या हम लोग अपने ही इंस्टीट्यूशन को कमजोर करेंगे? क्या ये सदन राजस्थान हाईकोर्ट का सबॉर्डिनेट है कि राजस्थान हाईकोर्ट इस सदन को डिक्टेट करेगा? विधानसभा में हमारे सवाल या प्रस्ताव का जवाब नहीं आएगा, तो क्या हम हाईकोर्ट जाएंगे? हाईकोर्ट में किसी मामले का निर्णय नहीं हो, तो क्या ये विधानसभा हाईकोर्ट को कह सकती है कि आप फैसला करिए ? जब ये विधानसभा नहीं कह सकती, तो हाईकोर्ट इस विधानसभा को कैसे डिक्टेट कर सकता है? मैं विनती करता हूं कि बहुत ही वरिष्ठ सदस्य और उनके आचरण ने राजस्थान की 7 करोड़ जनता को अपमानित और लांछित किया है। इसलिए इसे आप निर्देशित करें, इसकी जांच हो और इसका प्रतिवेदन सदन के पटल पर रखा जाए।

मैं सोचकर निर्णय करूंगा, उसके बाद सदन में हम फैसला करेंगे

विधानसभा अध्यक्ष डॉ सीपी जोशी ने धन्यवाद करते हुए कहा आप और हम सब जानते हैं कि कानून और संविधान के अंतर्गत विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका की शक्तियां डिफाइन की गई हैं। सदस्य जो प्रश्न लेकर आए हैं, मैं इस पर सोचकर निर्णय करूंगा। उसके बाद सदन में हम निर्णय करेंगे। 
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