राजस्थान का जिला पाली। यहां लोगों की परेशानी है कि यहां आसमान से 'जहर' बरसता है। चारों ओर जहरीला धुंआ है और हर समय कोयले के बारीक कण गिरते रहते हैं।
लोग त्रस्त हैं। उनकी आस-पास की हवा ही जहरीली है। वे न चैन की सांस ले पा रहे हैं न कोई काम कर पा रहे हैं। हालत यह है कि इस माहौल में लोगों को श्वास, दमा, चर्म और नेत्र रोग बढ़ रहे हैं।
इस कालिख के कारण लोग न यहां छत पर कपड़े सुखा सकते हैं और न ही खुले में कुछ चीजें ही बाहर रख सकते हैं।
हवा क्यों बनी जहरीली
दरअसल यहां औद्योगिक इकाइयों से निकलने वाले हानिकारक धुएं ने ऐसी स्थिति पैदा कर दी है कि आसमान से जहर बरस रहा है। धुएं के साथ गिरती कालिख लोगों के लिए परेशानी का सबब बनी हुई है।
औद्योगिक क्षेत्र द्वितीय चरण में वायु प्रदूषण से परेशान लोगों ने बुधवार को प्रदूषण नियंत्रण मण्डल, रीको कार्यालय और कलेक्टरेट में प्रदर्शन कर ज्ञापन सौंपा।
यहां प्रदर्शन के बाद लोग कलक्ट्रेट पहुंचे और रैली के रूप में नारेबाजी करते हुए विरोध जताया। इन्होंने थैली में भरकर लाई गई कोयले की कालिख एडीएम को सौंपी।
पाली देश का बीसवां प्रदूषित शहर
केन्द्रीय पर्यावरण प्रदूषण नियंत्रण मण्डल की ओर से बनाए गए 35 सर्वाधिक प्रदूषित क्लस्टर में पाली भी शामिल है। 2013 के अंतरिम सर्वे के अनुसार इन क्लस्टर्स में से पाली 20वां सर्वाधिक वायु प्रदूषित शहर है।
गणना में प्रदूषण स्कोर (वायु में विष की स्थिति और औद्योगिक गतिविधियां), प्रभाव (लोगों और जैविक पर्यावरण) और खतरा (सम्भावित प्रभावित आबादी, जोखिम का स्तर और संवेदनशील हालात) का आकलन किया गया।
पाली का वायु प्रदूषण जोखिम के स्तर के आधार पर सातवें स्थान पर है। यही नहीं, अतिरिक्त उच्च जोखिम तत्वों में भी दूसरे स्थान पर है।