गुर्जर समाज ने अपने देव स्थान मालासेरी में पीएम मोदी को अपने समुदाय में शामिल करते हुए प्रेम-विश्वास से लाल साफा पहनाकर एक बड़ी पहल की है। कहा जाता है कि गुर्जर समाज किसी को भी आसानी से लाल साफा नहीं पहनता है, लेकिन पीएम मोदी को लाल साफा पहनाकर उनके साथ बने रिश्ते को मजबूत किया है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार को राजस्थान आए। वे भीलवाड़ा के आसींद में मालासेरी डूंगरी पर देवनारायण भगवान के 111वें अवतरण वर्ष पर आयोजित कार्यक्रम में शामिल हुए। इस दौरान गुर्जर समाज ने पीएम मोदी का लाल रंग का साफा पहनाकर स्वागत और सम्मान किया। पीएम मोदी के लाल रंग के साफे को लेकर अब खूब चर्चा हो रही है। आइए जानते हैं इस लाल रंग के साफे का गुर्जर समाज में क्या महत्व हैं।
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दरअसल, गुर्जर समाज के पुरुष लाल रंग का साफा या फैटा बांधते हैं। इसे वीरता और एकता का प्रतीक माना जाता है। गुर्जर समाज में अपने सम्मानीय और आदरणीय व्यक्तियों को लाल रंग का साफा पहनाने की परंपरा लंबे समय से चली आ रही है। समाज के महंत, गुर्जर के नेता और सम्मानीय लोगों लाल रंग का साफा पहते हैं।
गुर्जर समाज ने अपने देव स्थान मालासेरी में पीएम मोदी को अपने समुदाय में शामिल करते हुए प्रेम-विश्वास से लाल साफा पहनाकर एक बड़ी पहल की है। क्योंकि, राजस्थान में मेहमान साफा पहनाकर स्वागत करना आम परंपरा है, लेकिन अपने समाज के प्रतीक चिन्ह से स्वागत करना एक अलग नजरिए से देखा जा रहा है।
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कहा जाता है कि गुर्जर समाज किसी को भी आसानी से लाल साफा नहीं पहनता है, लेकिन पीएम मोदी को लाल साफा पहनाकर उनके साथ बने रिश्ते को मजबूत किया है।
बतादें कि राजस्थान में 60 लाख गुर्जर आबादी है जो राजस्थान के एक बड़े हिस्से में रहती है। प्रधानमंत्री के दौरे से भाजपा और गुर्जर समाज के बीच जो अनकही खाई थी वह अब पटती नजर आ रही है। गुर्जर समाज हमेशा से भाजपा का कोर वोट बैंक रहा है जो 2018 में पायलट के चलते भाजपा से छिटक गया था। पीएम मोदी के इस दौरे का फायदा भाजपा को 2023 के विधानसभा चुनाव में देखने को मिल सकता है।