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निजी बसों में वसूला जा रहा है तिगुना किराया

Wed, 30 Jul 2014 07:37 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, जयपुर
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राजस्थान रोजवेज की 5000 बसों के पहिए मंगलवार आधी रात के बाद थम गए। रोडवेज कर्मचारियों ने राज्य सरकार की निजी बस ऑपरेटरों को बढ़ावा देने की मंशा के विरोध में बुधवार से दो दिवसीय हड़ताल शुरू कर दी।
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इधर, हड़ताल का फायदा उठाते हुए निजी बस संचालकों ने यात्रियों से तिगुना-चौगुना किराया वसूलना शुरू कर दिया है। ट्रेनें खचाखच भरकर चल रही हैं और लाखों यात्रियों को असुविधा का सामना करना पड़ रहा है। राजस्थान रोडवेज बसें यूपी, दिल्ली, हरियाणा, पंजाब, सहित 11 राज्यों में जाती-आती हैं। हड़ताल 31 जुलाई रात 12 बजे समाप्त हो जाएगी।

राजस्थान रोडवेज की बसों में राजस्थान सहित विभिन्न राज्यों से 12 लाख यात्री रोजना इसमें सफर करते हैं। नौ सौ करोड़ रुपए से अधिक के घाटे से जूझ रही राजस्थान रोजवेज को इस हड़ताल से 5 करोड़ रुपए रोजना का नुकसान भी झेलना पड़ेगा। खुद की हालत खस्ता होने के चलते रोडवेज प्रबंधन ने कर्मचारियों से हड़ताल वापस लेने की अपील जारी है और वार्ता का प्रस्ताव रखा है।
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बस अड्डा प्राधिकरण का विरोध
राजस्थान सरकार की बजट घोषणा में बस अड्डा प्राधिकरण बनाने की प्रस्ताव है। यह प्रधिकरण राजस्थान के सभी 80 बस अड्डों के रखरखाव एवं बस संचालन सभी गतिविधियों का जिम्मा लेगा।

घोषणा के तहत इन्ही बस अड्डों से निजी बस ऑपरेटरों की बसें भी दौड़ सकेंगी। साथ ही, निजी बस ऑपरेटर उन रूटों पर अपनी बसों के लिए परमिट ले सकते हैं, जिन रूटों पर राजस्थान रोडवेज की बसें दौड़ रही हैं।

रोडवेज यूनियन (एटक) के एम.एल. यादव ने बताया कि हड़ताल की घोषणा के बाद सरकार से बजट प्रस्ताव वापस लेने पर हुई वार्ता विफल रही। इस कारण मजबूरन हड़ताल का सहारा लेना पड़ रहा है। रोजवेज के प्रबंधन निदेशक भास्कर ए सावंत ने कहा कि यात्रियों को रिफंड देने की व्यवस्था कर दी गई है और कर्मचारियों से वार्ता के प्रयास जारी हैं।
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