राजधानी जयपुर में तेज रफ्तार वाहन बेहद जानलेवा साबित हो रहे हैं। हाल के कुछ महीनों में तेज रफ्तार वाहनों की टक्कर से कई लोगों की जान जा चुकी है और जो बच गए वे गंभीर रूप से चौटिल हो गए। दो दिन पहले मानसरोवर में एक काली थार ने स्कूटी सवार महिला को जोरदार टक्कर मार दी। थार अपने साथ महिला को 20 मीटर तक घसीटती ले गई। इसके बाद गंभीर रूप से घायल महिला को अस्पताल ले जाया गया जहां वो जान बचाने की जंग लड़ रही है।
वहीं जयपुर के हवामहल के सामने देर रात रील शूट कर रहे इंजीनियरिंग छात्रों के साथ बड़ा हादसा हो गया। सीसीटीवी फुटेज में दिख रहा है कि एक कार चालक ने पहले बाइक सवार छात्रों को टक्कर मारी और फिर रिवर्स में कार दौड़ाकर उन्हें कुचलने की कोशिश की। घटना के बाद आरोपी मौके से फरार हो गया। यह घटना भी 3 मई की रात करीब डेढ़ बजे की बताई जा रही है।
मानसरोव में ही इसी साल हिट एंड रन का बड़ा मामला सामने आ चुका है जिसमें सड़क पर रेस लगाती तेज रफ्तार ऑडी ने कार ने फुटपाथ पर खाना खा रहे लोगों को कुचल दिया। 16 लोग इसकी चपेट में आए, एक की मौत हो गई। नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो की ताजा रिपोर्ट में सड़क हादसों को लेकर कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं।
2024 में 53 बड़े शहरों में 73 हजार से ज्यादा ट्रैफिक हादसे, जयपुर मौतों के मामले में दूसरे स्थान पर
देश के 53 बड़े शहरों में वर्ष 2024 के दौरान कुल 73,426 ट्रैफिक हादसे दर्ज किए गए। इन हादसों में 63,519 लोग घायल हुए, जबकि 17,797 लोगों की मौत हुई। सबसे ज्यादा मौतें दिल्ली में दर्ज की गईं, जहां 2,181 लोगों की जान गई। इसके बाद जयपुर में 1,001 और बेंगलुरु में 894 लोगों की मौत हुई।
सड़क हादसों का दबदबा
कुल ट्रैफिक हादसों में से 71,239 मामले सड़क दुर्घटनाओं के रहे, जो कुल हादसों का 97 प्रतिशत हैं। सड़क हादसों के मामलों में दिल्ली सबसे आगे रही, जहां 5,573 केस दर्ज हुए। इसके बाद बेंगलुरु (4,769) और हैदराबाद (3,785) का स्थान रहा।
ओवरस्पीड बनी सबसे बड़ा कारण
सड़क हादसों में मौतों का सबसे बड़ा कारण ओवरस्पीडिंग रहा। 2024 में सड़क दुर्घटनाओं में हुई कुल 15,956 मौतों में से 8,418 मौतें तेज रफ्तार के कारण हुईं, जो कुल मौतों का 52.8 प्रतिशत है। इसके अलावा खतरनाक या लापरवाही से वाहन चलाने और ओवरटेकिंग के कारण 4,805 लोगों की मौत हुई, जो कुल मौतों का 30.1 प्रतिशत है। वहीं शराब या नशे की हालत में ड्राइविंग के कारण 411 लोगों की जान गई। इस श्रेणी में आगरा सबसे ऊपर रहा, जहां 73 मौतें दर्ज की गईं।
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रिहायशी इलाकों में सबसे ज्यादा हादसे
स्थान के आधार पर देखें तो सबसे ज्यादा सड़क हादसे रिहायशी क्षेत्रों के आसपास हुए। ऐसे इलाकों में 5,194 लोगों की मौत हुई, जो कुल मौतों का 32.6 प्रतिशत है। इसके बाद मनोरंजन स्थलों और सिनेमा हॉल के आसपास 1,291 तथा स्कूल-कॉलेजों के पास 1,181 लोगों की मौत दर्ज की गई। पैदल पार पथ (Pedestrian Crossing) पर सबसे ज्यादा मौतें अहमदाबाद में 180 और दिल्ली में 147 दर्ज की गईं।
नेशनल हाईवे पर भी बड़ा खतरा
53 बड़े शहरों में कुल सड़क हादसों में 17.8 प्रतिशत हादसे नेशनल हाईवे पर हुए, जबकि सड़क हादसों में कुल मौतों में 25.4 प्रतिशत मौतें राष्ट्रीय राजमार्गों पर दर्ज की गईं।