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महिला ने कबाड़ में दे दिए एक लाख, कबाड़ी युवकों ने घर आकर लौटाए

Fri, 29 Jul 2016 03:41 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली
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देश में बढ़ते भ्रष्टाचार और बेईमानी को लेकर बेशक बहुत बातें होती हों लेकिन कुछ चर्चाएं ईमानदारी और नेक नियती की भी होनी चाहिए। राजस्‍थान के हनुमानगढ़ जिले में दो कबाड़ी युवकों की ईमानदारी का एक ऐसा ही किस्सा सामने आया है कि सुनने वाला हर कोई उनकी तारीफ कर रहा है। चलिए, तो अब आपको विस्तार से बताते हैं पूरा मामला।
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हिंदुस्तान टाइम्स की खबर के अनुसार मामला राजस्‍थान के हनुमानगढ़ जिले के एक गांव का है। जहां शांति भाडू नाम की एक महिला ने अखबारों और किताबों की रद्दी कबाड़ खरीदने वाले दो युवकों को बेच दी। महिला को तब यह नहीं पता था कि उसने रद्दी के साथ कितनी महत्वपूर्ण चीज उन युवकों को सौंप दी है। 

लेकिन अगले दिन जब दोनों युवक उसके सामने आकर खड़े हो गए और एक लाख रुपये की नकदी उसके हाथ में थमाई तो महिला के होश उड़ गए। युवकों ने बताया कि शांति ने गलती से रद्दी के साथ उन्हें यह एक लाख रुपये की नकदी भी दे दी थी। सुरेन्द्र और शंकर वर्मा नाम के दोनों भाइयों की ईमानदारी देख महिला शांति और उनके पति ‌किशोर ही नहीं पूरे गांव के लोग अचंभे में पड़ गए।
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रुपयों के मालिक की घर घर जाकर की तलाश 

हैरत इस बात की भी थी कि युवकों को यह नकदी लौटाने के लिए भी काफी मशक्कत करनी पड़ी। युवकों ने बताया कि वह घर घर जाकर कबाड़ इकट्ठा करते हैं, मंगलवार को भी उन्होंने कई घरों से कबाड़ लिया और शाम को घर जाकर उसकी छानबीन करने लगे। 

इसी बीच उन्हें किताबों के एक बंडल के बीच 100 और 500 के नोटों की कुछ गडि्डयां मिली। गिनने पर वह पूरे एक लाख रुपये निकले। युवकों ने बताया कि इतनी बड़ी रकम देखकर वह पूरी रात सो नहीं सके। 

शंकर नाम के युवक ने बताया कि हम लोग घर घर जाकर कबाड़ खरीदते हैं ऐसे में समझ नहीं आया कि ये कबाड़ कहां से खरीदा था जिसमें नोटों की गड्डियां निकलीं। 
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युवकों की ईमानदारी देख चौंक गए गांव वाले

इसके लिए उन्होंने दोबारा वो किताबें खंगाली जिनमें से गड्डियां निकलीं थी, एक किताब में शालू पुनिया का नाम लिखा हुआ था। सुबह होते ही बुधवार को वह वापिस उन घरों में पहुंचे जहां जहां से कबाड़ खरीदा गया था। 

किस्मत से उन्हें जल्द ही पता चल गया कि शालू पुनिया किस गांव में रहती है। गांव के ही कुछ ग्रामीणों की मदद से वह उस घर तक भी पहुंच गए जहां भाडू परिवार रहता था। 

शालू उनकी पोती का नाम था। इसके बाद युवकों ने जेब से एक लाख रुपये निकाल कर लौटाए तो पति पत्नी के साथ ही गांव वाले भी भौचक्के रह गए। किशोर भाडू ने बाया कि मुझे नहीं पता मेरी पत्नी ने एक लाख रुपये की यह नकदी किताबों के पुराने बक्‍शे में कैसे रख दी। दोनों युवकों की ईमानदारी की तारीफ करते हुए उन्होंने कहा वे उनके ‌किसी फरिश्ते से कम नहीं हैं।
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