राजस्थान के स्वास्थ्य विभाग ने पतंजलि की दवा कोरोनिल को लेकर जयपुर के एनआईएमएस अस्पताल को एक नोटिस भेजा है। अधिकारियों ने शुक्रवार को बताया कि इस नोटिस में अस्पताल प्रशासन से कोरोना वायरस मरीजों पर पतंजलि की दवा का ट्रायल करने का स्पष्टीकरण मांगा गया है।
जयपुर के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. नरोत्तम शर्मा ने बताया, 'हमने अस्पताल को बुधवार को नोटिस जारी किया था, जिसमें तीन दिन के भीतर स्पष्टीकरण देने को कहा गया था। अस्पताल प्रशासन ने न तो सरकार को इस कथित ट्रायल की जानकारी दी और न ही अनुमति मांगी थी।'
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उन्होंने कहा कि नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस (एनआईएमएस)की ओर से जवाब का इंतजार किया जा रहा है। राजस्थान सरकार ने स्पष्ट किया है कि कोरोनिल को दवाई के रूप में तब तक इस्तेमाल नहीं किया जाएगा जब तक इसे आयुष मंत्रालय से अनुमति नहीं मिल जाती है।
बता दें कि पतंजलि ने एनआईएमएस विश्वविद्यालय के साथ मिलकर यह दवा बनाई है। मंगलवार को दवा लॉन्च करने के साथ दावा किया गया था कि कोरोना के मामलों में यह तीन दिन में करीब 69 फीसदी और सात दिनों में सौ फीसदी सकारात्मक परिणाम देती है।
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पतंजलि की यह दवा कोरोनिल इस समय विवादों का केंद्र बनी हुई है। आयुष मंत्रालय ने दवा से जुड़े विज्ञापनों को बंद करने और पतंजलि से कहा है कि वह इस पर अपना दावा सार्वजनिक न करे। सरकार ने कहा है कि जब तक इसकी जांच नहीं हो जाती, तब तक इसके प्रचार-प्रसार पर रोक लगी रहेगी।
पतंजलि ने कोरोनिल को लॉन्च करते वक्त दावा किया था कि यह सात दिन में कोरोना वायरस के मरीज को पूरी तरह ठीक कर सकती है। रामदेव ने कहा था कि कंपनी ने कहा था कि यह दवा हरिद्वार स्थित पतंजलि शोध केंद्र ने जयपुर के एनआईएमएस के साथ मिलकर विकसित की है।