3 मई को आयोजित नीट परीक्षा में कथित पेपर लीक मामले की जांच अब सीबीआई के हाथों में है। जांच आगे बढ़ने के साथ इस नेटवर्क की परतें खुल रही हैं। शुरुआती जांच में सामने आया है कि पेपर लीक कराने की पूरी प्लानिंग कई महीने पहले, दिवाली के आसपास ही शुरू हो चुकी थी। गिरोह ने दावा किया था कि परीक्षा में आने वाले 143 सवाल पहले से उपलब्ध कराए जाएंगे। इसी भरोसे पर राजस्थान में 45 लाख रुपए तक की डील हुई थी। हालांकि बाद में अपेक्षा से कम सवाल मैच होने पर विवाद खड़ा हो गया और पूरी रकम माफिया तक नहीं पहुंच सकी।
महाराष्ट्र से हरियाणा होते हुए राजस्थान तक पहुंचा पेपर
जांच एजेंसियों के अनुसार महाराष्ट्र के अहिल्याबाई नगर निवासी धनंजय नामक युवक से यह पेपर सौरभ खरनार तक पहुंचा। इसके बाद हरियाणा के यश यादव के जरिए नेटवर्क राजस्थान तक सक्रिय हुआ। बताया जा रहा है कि जमवारामगढ़ के दो भाइयों, दिनेश और मांगीलाल ने इसी चैनल के माध्यम से पेपर खरीदने की डील की थी।
गिरोह ने भरोसा दिलाया था कि उनके दिए गए 143 प्रश्न परीक्षा में आएंगे। इस भरोसे पर दोनों भाइयों ने कुल रकम का करीब आधा हिस्सा पहले ही दे दिया था, जबकि बाकी रकम परीक्षा के बाद देने की बात तय हुई थी।
120-130 सवाल ही मैच हुए, बिगड़ गई डील
सूत्रों के मुताबिक परीक्षा के बाद जब सवालों का मिलान किया गया तो करीब 120 से 130 प्रश्न ही समान पाए गए। इसके बाद खरीदार पक्ष ने पूरी रकम देने से इंकार कर दिया, इसी वजह से कथित पेपर माफिया तक तय रकम नहीं पहुंच पाई।
बताया जा रहा है कि दिनेश और मांगीलाल ने पहले से कुछ छात्रों को भरोसा दिला दिया था कि उनके पास पक्का पेपर आने वाला है। पिछले साल इलाके के कई छात्रों के चयन होने के कारण स्थानीय स्तर पर भी इस नेटवर्क पर भरोसा बढ़ा था।
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गेस पेपर बनाकर फैलाया नेटवर्क
जांच में यह भी सामने आया है कि इस बार गिरोह ने सीधे लीक पेपर की बजाय उसे गेस पेपर रूप देकर फैलाया। वजह यह थी कि पिछले वर्षों में पेपर लीक मामलों पर एजेंसियों की निगरानी बढ़ चुकी थी। ऐसे में माफिया को आशंका थी कि सीधे प्रश्नपत्र साझा करने पर वे आसानी से पकड़े जा सकते हैं।
इसी रणनीति के तहत कथित पेपर को कोचिंग सर्किल और छात्रों के बीच संभावित प्रश्नों के तौर पर फैलाया गया। बाद में यही सामग्री सीकर के कुछ शिक्षकों और फिजिक्स फैकल्टी तक पहुंची। गहराई से जांच करने पर उन्हें सवालों के असामान्य मेल का अंदेशा हुआ।
रात 2 बजे पुलिस थाने पहुंचे शिक्षक
सूत्रों के अनुसार 4 मई की रात करीब 2 बजे कुछ शिक्षक उद्योग नगर थाने पहुंचे और मामले की जानकारी देने की कोशिश की। हालांकि औपचारिक शिकायत दर्ज नहीं हो सकी। बाद में मामला NTA तक पहुंचा, जहां से सूचना खुफिया एजेंसियों और फिर जांच टीमों को साझा की गई।
इसके बाद कई छात्रों और संदिग्धों को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू हुई। जांच में यह भी सामने आया कि पेपर टेलीग्राम और व्हाट्सएप जैसे प्लेटफॉर्म्स के जरिए बड़ी संख्या में छात्रों तक पहुंचा था।
45 लाख से 2 हजार रुपए तक पहुंचा
शुरुआत में जहां इस कथित पेपर डील की कीमत लाखों में थी, वहीं परीक्षा से पहले यह सामग्री कई स्तरों पर बेहद कम दामों में बांटी जाने लगी। सूत्रों के मुताबिक कुछ छात्रों तक यह 2 हजार रुपए तक में पहुंचा, जबकि कई लोगों को मुफ्त में भी साझा किया गया।