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NEET 2026 UG Paper Leak: पेपर लीक केस में छापेमारी तेज, पांचों आरोपियों से पूछताछ जारी; राजस्थान भी पहुंची टीम

Thu, 14 May 2026 08:16 PM IST
जयपुर ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर

सार

नीट-2026 यूजी पेपर लीक मामले में छापेमारी तेज कर दी गई है। सभी पांच आरोपियों से सीबीआई की टीम पूछताछ कर रही है। वहीं, एक टीम ने जयपुर के जमवारामगढ़ स्थित आरोपियों के घरों व फार्म हाउस पर छापेमारी कर परिवार के लोगों से पूछताछ की है। जांच में पेपर लीक नेटवर्क के राजस्थान, हरियाणा और महाराष्ट्र तक फैले होने के संकेत मिले हैं।
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नीट-2026 पेपर लीक मामले की जांच अब राजस्थान के गांवों तक पहुंची। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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नीट 2026 यूजी पेपर लीक मामले के सभी पांचों आरोपियों को दिल्ली स्थित के राउज एवेन्यू कोर्ट में पेश किया गया। फिर सीबीआई कोर्ट में लाया गया है। यहां गिरफ्तार पांच आरोपियों को सात दिन की हिरासत में भेजा गया है। 

अब तक शुभम खैरनार, मांगीलाल बीवाल, विकास बीवाल,दिनेश बीवाल और यश यादव को गिरफ्तार किया गया है। इस मामले में गिरफ्तार चार आरोपी-दिनेश बिंवाल, मांगीलाल बिंवाल, विकास बिंवाल और हरियाणा निवासी यश यादव को सीबीआई दिल्ली ले गई है। वहां सभी को आमने-सामने बैठाकर पूछताछ की जा रही है।

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आरोपी दिनेश व मांगीलाल बिंवाल के घर पहुंची टीम
नीट-2026 यूजी पेपर लीक मामले की जांच अब तेजी से राजस्थान के गांवों तक पहुंच गई है। केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की टीम जयपुर जिले के जमवारामगढ़ पहुंची, जहां मामले में गिरफ्तार आरोपी दिनेश बिंवाल और मांगीलाल बिंवाल के घरों पर जांच की गई।

सीबीआई अधिकारियों ने परिवार के सदस्यों से लंबी पूछताछ की और कई दस्तावेज, मोबाइल फोन तथा डिजिटल रिकॉर्ड खंगाले। टीम ने आरोपियों के फार्म हाउस और अन्य ठिकानों पर भी सर्च ऑपरेशन चलाया। जांच एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि पेपर लीक नेटवर्क कैसे काम करता था और इसमें किन-किन लोगों की भूमिका थी।
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राजस्थान, हरियाणा और महाराष्ट्र तक इस नेटवर्क के लिंक मिले
सूत्रों के अनुसार जांच में सामने आया है कि कथित तौर पर नीट पेपर की हार्ड कॉपी पहले हासिल की गई, फिर उसे हाथ से लिखकर स्कैन किया गया और बाद में वॉट्सएप व कोचिंग नेटवर्क के जरिए अलग-अलग राज्यों तक पहुंचाया गया। राजस्थान, हरियाणा और महाराष्ट्र तक इस नेटवर्क के लिंक मिलने की बात कही जा रही है।

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जांच एजेंसियों के मुताबिक कई कोचिंग संस्थान भी रडार पर हैं। सीबीआई अब पेपर लीक के पीछे पैसों के लेनदेन, डिजिटल चैट और नेटवर्किंग की गहराई से जांच कर रही है। इससे पहले एसओजी ने करीब 150 अभ्यर्थियों और उनके परिजनों से पूछताछ की थी। संदिग्धों के मोबाइल और इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस भी जब्त किए गए थे, जिन्हें अब सीबीआई ने अपने कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी है।

सीबीआई ने अपनी रिमांड अर्जी में आरोप लगाया कि परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र व्हाट्सएप और टेलीग्राम के जरिए पीडीएफ फॉर्मेट में प्रसारित किए गए थे, जिससे परीक्षा की गोपनीयता भंग हुई। इस मामले में 12 मई को उच्च शिक्षा विभाग (NTA डिवीजन) के निदेशक वरुण भारद्वाज की शिकायत पर एफआईआर दर्ज की गई थी। विशेष लोक अभियोजक वीके पाठक और नीतू सिंह ने अदालत को बताया कि राजस्थान की स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप की जांच में कुछ लीक प्रश्नों की पुष्टि हुई थी, जिसके बाद सरकार ने परीक्षा रद्द करने का फैसला लिया।

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टेलीग्राम के जरिए पीडीएफ फॉर्मेट में साझा किए थे पेपर
सीबीआई के अनुसार, अप्रैल 2026 में नासिक निवासी शुभम ने यश यादव को बताया था कि मांगीलाल ने अपने छोटे बेटे के लिए परीक्षा से पहले लीक प्रश्नपत्र की व्यवस्था करने हेतु उससे 10 से 12 लाख रुपये में संपर्क किया था। एजेंसी का दावा है कि 29 अप्रैल को यश यादव ने फिजिक्स, केमिस्ट्री और बायोलॉजी के लीक प्रश्नपत्र टेलीग्राम के जरिए पीडीएफ फॉर्मेट में साझा किए थे।

सीबीआई के मुताबिक, मांगीलाल ने कथित तौर पर 10 लाख रुपये के सौदे के तहत ये प्रश्नपत्र प्राप्त किए और उन्हें अपने बेटे अमन बीवाल समेत रिश्तेदारों और परिचित नीट अभ्यर्थियों में बांटा। जांच एजेंसी ने यह भी आरोप लगाया कि विकास बीवाल ने कई अभ्यर्थियों से संपर्क कर उनकी जानकारी व्हाट्सएप और इंस्टाग्राम के माध्यम से यश यादव को भेजी, ताकि लीक प्रश्नपत्र साझा किए जा सकें।

कुछ डिलीट किए गए डेटा की फॉरेंसिक जांच कराई जाएगी

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सीबीआई ने अदालत को बताया कि आरोपियों के मोबाइल फोन से आपत्तिजनक चैट, लीक प्रश्नपत्र और अन्य डिजिटल सबूत बरामद हुए हैं। वहीं, कुछ डिलीट किए गए डेटा की फॉरेंसिक जांच कराई जाएगी।

एजेंसी ने कहा कि अन्य आरोपियों की पहचान, पेपर लीक के स्रोत का पता लगाने, डिजिटल और वित्तीय लेन-देन की जांच करने, सबूत जुटाने और नाटाअधिकारियों की संभावित भूमिका की जांच के लिए आरोपियों से हिरासत में पूछताछ जरूरी है।

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