गोविंद देव मंदिर में यूं हुई नववर्ष की शुरुआत
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नव संवतसर 2074 का स्वागत और नवरात्र स्थापना पर्व के मौके पर मंगलवार को विभिन्न कार्यक्रम आयोजित हो रहे है।
कहीं हाथियों से पुष्प वर्षा करवाई गई तो कहीं माता के दरबार में पहले नवरात्रा पर भक्तों की कतार लगी रही। मंगलवार सुबह अमावस्या की तिथि सुबह 8.27 बजे तक ही रही, इसके बाद प्रतिपदा की शुरुआत हुई। चैत्र प्रतिपदा के साथ ही नवरात्रा का पर्व भी शुरू हुआ। घट स्थापना सुबह 08.27 के बाद सर्वार्थ सिद्धियोग में 01 बजकर 41 मिनट के बीच की गई। नववर्ष की शुरुआत घंटे घड़ियालों के साथ की गई।
बच्चों ने जहां राहगीरों के तिलक लगाए तो वहीं घरों में भी पूजा की गई। आमेर स्थित शिला माता के मंदिर में भक्त माता के दर पर दर्शन करने पहुंचे।
यूं राम नवमी होगी खास
मंदिर में कतार में लगे भक्त
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नवरात्रा के दौरान नवमी की तिथि को भगवान राम का जन्मोत्सव पुष्य नक्षत्र में मनाया जाएगा। पं. राजकुमार चतुर्वेदी के अनुसार भगवान राम का जन्मोत्सव पुष्य नक्षत्र में पड़ना शुभदायक रहेगा। उनके अनुसार भगवान के जन्म के समय भी पुष्य नक्षत्र का योग था। इससे सभी शुभता का आगमन होगा। पुष्य नक्षत्र की शुरुआत भगवान के जन्मोत्सव के एक दिन पूर्व मंगलवार की रात 2.34 बजे होगी, जो बुधवार को राम नवमी की दोपहर 1.40 बजे तक रहेगी। रामनवमी को सूर्योदय भी पुष्य नक्षत्र के संयोग में होगा। जिससे पूरे दिन इसका प्रभाव रहेगा।
इस बार नवरात्रा में कई विशेष योग होंगे
तिलक लगाकर किया स्वागत
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28 मार्च सर्वार्थ सिद्धियोग सूर्योदय से 01 बजकर 41 मिनिट
30 मार्च सर्वार्थ सिद्धियोग सूर्योदय से 09 बजकर 24 मिनिट
31 मार्च रवि योग
1 अप्रैल को अमृत योग सर्वार्थ सिद्धियोग सूर्योदय से रात 02.54 तक
2 अप्रैल द्वि पुष्कर व् राजयोग दोपहर 03.16 से रात 01.14 तक
4 अप्रैल रवियोग रात 11 बजकर 15 मिनिट से
5 अप्रैल रवियोग संपूर्ण दिन रात