नागौर जिले के जायल उपखंड में सोमवार सुबह से शुरू हुई लगातार पांच घंटे की बारिश ने किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। खेतों में जमा पानी ने मूंग, बाजरा, ग्वार, मोठ और तिल जैसी फसलों को भारी नुकसान पहुंचाया, और खेत तालाब में बदल गए। दो दिन पहले हुई बारिश से पहले ही प्रभावित फसलें अब पूरी तरह से बर्बाद हो गई हैं। जायल और आसपास के गांवों बड़ी खाटू, दुग्सताऊ, खिंयाला, तरनाऊ, बोड़वा, छापड़ा, रातगा, बोदिंद, जाखन, दुगोली, छाजोली, मांगलोद, सोमना, मेरवास, फरडोद और कटौती में बारिश का असर सबसे ज्यादा देखने को मिला।
कटी हुई फसलें पानी में डूब गईं और दाने अंकुरित होकर काले पड़ गए। इससे किसानों को न केवल आर्थिक नुकसान हुआ, बल्कि फसल की गुणवत्ता और कीमत भी गिर गई। किसान रामनिवास ने बताया कि दो दिन पहले की बारिश से पहले ही फसलें प्रभावित थीं, और अब इस ताजा बारिश ने उनकी उम्मीदों पर पूरी तरह पानी फेर दिया।
क्षेत्र में मूंग, मोठ, बाजरा और ग्वार की कटाई जोरों पर थी और लगभग 50 प्रतिशत फसल खेतों में ही थी, जो अब भीगकर खराब हो गई। खड़ी फसलें भी झुक गईं, जिससे कटाई का काम और कठिन हो गया। ग्रामीणों का कहना है कि मौसम की यह मार उनकी सालभर की मेहनत को बर्बाद कर रही है।
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जायल नगरपालिका क्षेत्र में भी बारिश का असर देखने को मिला। शहर में जलभराव की स्थिति बनी और कई दुकानों में पानी घुस गया। नगरपालिका ने टैंकरों के जरिए पानी निकालने का प्रयास किया, लेकिन लगातार बारिश के कारण स्थिति नियंत्रण में लाना चुनौतीपूर्ण रहा।
किसानों ने सरकार से मुआवजे की मांग की है, ताकि इस नुकसान की भरपाई हो सके। मौसम विभाग ने अगले कुछ दिनों में और बारिश की संभावना जताई है, जिससे जायल और आसपास के जिलों के किसानों की चिंता और बढ़ गई है।
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