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अनोखा कन्यादान: शहीद फौजी की बेटी की शादी में 24 जवानों ने अदा किया पिता का फर्ज, 24 वर्ष पुराना वचन अब निभाया

Sun, 22 Feb 2026 04:55 PM IST
हिमांशु प्रियदर्शी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नागौर

सार

Nagaur News: नागौर के कड़वासरा की ढाणी में शहीद भागीरथ कड़वासरा की बेटी सुष्मिता की शादी में 13 ग्रेनेडियर्स के 24 जवान ‘पिता’ बनकर पहुंचे। जवानों ने कन्यादान सहित सभी रस्में निभाईं, वर्षों पुराना वादा पूरा किया और फौजी भाईचारे का उदाहरण पेश किया।
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शौर्य चक्र विजेता शहीद भागीरथ की बेटी की शादी में वर्षों पुराना वादा निभाने पहुंचे सेना के जवान - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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नागौर जिले के मेड़ता उपखंड के कड़वासरा की ढाणी में शनिवार को एक ऐसा दृश्य देखने को मिला, जिसने पूरे गांव को भावुक कर दिया। शौर्य चक्र विजेता शहीद भागीरथ कड़वासरा की बेटी सुष्मिता की शादी में भारतीय सेना की 13 ग्रेनेडियर्स के 24 साथी जवान ‘पिता’ बनकर पहुंचे। यह आयोजन केवल एक पारिवारिक समारोह नहीं रहा, बल्कि फौजी भाईचारे, कर्तव्यनिष्ठा और वचनबद्धता का जीवंत उदाहरण बन गया।

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साथियों ने निभाया वर्षों पुराना वादा
13 ग्रेनेडियर्स बटालियन (गंगानगर-जैसलमेर सेक्टर) के 24 जवान विशेष रूप से नागौर पहुंचे। इस अवसर पर कमान अधिकारी कर्नल सोमेन्द्र कुमार, अन्य अधिकारी और सेवानिवृत्त कर्नल सुरेश चंद्र राणा भी मौजूद रहे। जवानों ने दुल्हन सुष्मिता को गोद में बिठाया, कन्यादान की रस्म निभाई, फेरे लगवाए और आशीर्वाद दिया। विदाई के समय जवानों और ग्रामीणों की आंखें नम थीं, वहीं वातावरण गर्व और सम्मान की भावना से भरा हुआ था।

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ग्रामीणों ने इसे एक अनूठा उदाहरण बताया। एक ग्रामीण ने कहा कि आज के समय में लोग रिश्ते निभाने से कतराते हैं, लेकिन सेना ने दिखाया कि वादा निभाना क्या होता है।


 
शहीद जवान की शौर्य गाथा
भागीरथ कड़वासरा का जन्म 10 जनवरी 1978 को नागौर जिले के इसी गांव में हुआ था। वर्ष 1995 में वे भारतीय सेना की 13 ग्रेनेडियर्स में भर्ती हुए। 8 जून 2002 को असम के मिलनपुर गांव में आतंकवादियों से मुकाबले के दौरान उन्होंने अदम्य साहस का परिचय दिया और वीरगति को प्राप्त हुए। उनकी बहादुरी के लिए 26 मार्च 2003 को उन्हें मरणोपरांत शौर्य चक्र से सम्मानित किया गया।

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उनके पीछे पत्नी संतोष देवी और नन्ही बेटी सुष्मिता रह गई थीं। उस समय उनके साथियों ने वादा किया था कि वे उनकी बेटी की हर खुशी में साथ रहेंगे। शनिवार को यह वादा साकार हुआ।
 
मां की आंखों में आंसू और गर्व
शहीद की पत्नी संतोष देवी की आंखों में आंसू थे, लेकिन चेहरे पर गर्व स्पष्ट दिखाई दे रहा था। उन्होंने कहा कि भागीरथ जी भले ही आज साथ नहीं हैं, लेकिन उनके साथी आज भी परिवार की तरह साथ खड़े हैं।
 
फौजी परंपरा का संदेश
जवानों ने एक स्वर में कहा कि शहीद साथी से किया गया वादा हमेशा जिंदा रहेगा। यह आयोजन केवल एक शादी नहीं, बल्कि उस परंपरा का प्रतीक बनकर सामने आया, जहां फौजी भाईचारा रक्त संबंधों से आगे बढ़कर निभाया जाता है।

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