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Rajasthan: जब शरीर ने नहीं दिया साथ तो हौसले ने लिख दिया इतिहास; 15 साल का गर्वित बना एक दिन का कलेक्टर

Thu, 04 Jun 2026 12:42 PM IST
नागौर ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, डीडवाना-कुचामन

सार

राजस्थान के डीडवाना-कुचामन जिले में 15 वर्षीय गर्वित रेवाड़ का आईएएस बनने का सपना एक दिन के लिए सच हो गया। डीएमडी (ड्यूशेन मस्कुलर डिस्ट्रॉफी) जैसी गंभीर और लाइलाज बीमारी से जूझ रहे गर्वित को जिला प्रशासन ने प्रतीकात्मक रूप से एक दिन का जिला कलेक्टर बनाया
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गर्वित रेवाड़ - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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डीडवाना-कुचामन जिला मुख्यालय में बुधवार को एक भावुक, प्रेरणादायक और यादगार दृश्य देखने को मिला। लाडनूं क्षेत्र के रोडू गांव निवासी 15 वर्षीय गर्वित रेवाड़ का आईएएस बनने का सपना एक दिन के लिए सच हो गया। जिला प्रशासन ने उसे प्रतीकात्मक रूप से एक दिन का जिला कलेक्टर बनाया और उसका सम्मान किया। इस पहल ने न केवल गर्वित के चेहरे पर मुस्कान ला दी, बल्कि वहां मौजूद हर व्यक्ति को भावुक कर दिया।

राजकीय वाहन से कलेक्ट्रेट पहुंचा गर्वित

डीएमडी (ड्यूशेन मस्कुलर डिस्ट्रॉफी) जैसी गंभीर और लाइलाज बीमारी से जूझ रहे गर्वित को पूरे सम्मान के साथ राजकीय वाहन से कलेक्ट्रेट लाया गया। कलेक्ट्रेट पहुंचने पर जिला कलेक्टर अवधेश मीणा ने स्वयं गुलदस्ता भेंट कर उसका स्वागत किया। इसके बाद गर्वित को जिला कलेक्टर की कुर्सी पर बैठाया गया। इस दौरान उसके चेहरे पर खुशी, आत्मविश्वास और अपने सपने को जीने का उत्साह साफ दिखाई दे रहा था।

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गर्वित रेवाड़ को माला पहनाते हुए - फोटो : अमर उजाला

अधिकारियों की बैठक लेकर दिए जरूरी निर्देश

कलेक्टर की कुर्सी संभालने के बाद गर्वित ने अधिकारियों की बैठक भी ली। बैठक के दौरान उसने आम जनता की समस्याओं के त्वरित समाधान पर जोर दिया और अधिकारियों से कहा कि लोगों की शिकायतों को प्राथमिकता के आधार पर सुनकर उनका समय पर निस्तारण किया जाए। गर्वित ने बैठक के दौरान प्रतीकात्मक रूप से एक दिन के राजकीय अवकाश की घोषणा भी की। उसकी इस घोषणा पर वहां मौजूद अधिकारियों और कर्मचारियों ने तालियां बजाकर उसका उत्साहवर्धन किया।

बीमारी के बावजूद नहीं टूटा हौसला

गर्वित की संघर्ष की कहानी किसी प्रेरणा से कम नहीं है। वह डीएमडी जैसी गंभीर बीमारी से पीड़ित है, जिसके कारण उसके शरीर के अधिकांश अंग सामान्य रूप से काम नहीं करते। इसके बावजूद उसकी सोच, आत्मविश्वास और संकल्प शक्ति बेहद मजबूत है। उसने हाल ही में कक्षा 10वीं की परीक्षा में 82.83 प्रतिशत अंक हासिल किए हैं। लिखने में असमर्थ होने के बावजूद उसने अपने उत्तर बोलकर लिखवाए और शानदार सफलता प्राप्त की।

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मौके पर मौजूद लोग - फोटो : अमर उजाला
माता-पिता की इच्छा पर प्रशासन ने पूरा किया सपना

जिला कलेक्टर अवधेश मीणा ने बताया कि गर्वित के माता-पिता ने प्रशासन को उसके आईएएस बनने के सपने और उसकी इच्छा के बारे में जानकारी दी थी। इसके बाद प्रशासन ने विशेष पहल करते हुए उसका सपना पूरा करने का निर्णय लिया। उन्होंने कहा कि यह पहल केवल गर्वित के लिए ही नहीं, बल्कि समाज के लिए भी एक प्रेरणादायक संदेश है कि मजबूत इच्छाशक्ति और हौसले के सामने कोई भी कठिनाई बड़ी नहीं होती।

युवाओं के लिए प्रेरणा बना गर्वित

गर्वित रेवाड़ की यह कहानी आज हजारों युवाओं के लिए प्रेरणा बन गई है। गंभीर बीमारी से संघर्ष करते हुए भी उसने अपने सपनों को जीवित रखा और यह साबित कर दिया कि परिस्थितियां चाहे कितनी भी कठिन क्यों न हों, दृढ़ संकल्प और सकारात्मक सोच के बल पर हर मंजिल तक पहुंचा जा सकता है।
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