देश की संसद में शुक्रवार को शून्यकाल के दौरान राजस्थान की राजनीति में भूचाल लाने वाला विधायक निधि (MLA-LAD Fund) घोटाला जोरदार तरीके से उठा। नागौर से राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (RLP) के सांसद हनुमान बेनीवाल ने लोकसभा में यह मुद्दा उठाते हुए केंद्र सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की। उन्होंने तीनों आरोपित विधायकों को तुरंत बर्खास्त करने की मांग रखी।
स्टिंग में नगद लेन-देन, सौदेबाजी और कमीशन की डील कैमरे पर रिकॉर्ड हुई। बाद में कुछ सरकारी अधिकारियों की भी 10% कमीशन मांगने की बात सामने आई।
भजनलाल सरकार ने क्या कार्रवाई की?
दावा है कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने मामले को गंभीर मानते हुए "जीरो टॉलरेंस" नीति अपनाई। तीनों विधायकों के MLA-LAD फंड खाते तुरंत फ्रीज कर दिए गए। उच्च स्तरीय जांच समिति गठित: मुख्य सतर्कता आयुक्त भास्कर ए. सावंत की अध्यक्षता में चार सदस्यीय कमेटी (15 दिनों में रिपोर्ट)।
SIT स्तर की जांच शुरू
मामला विधानसभा की सदाचार समिति (Ethics Committee) को सौंपा गया। भाजपा और कांग्रेस ने अपने विधायकों को शो-कॉज नोटिस जारी किया। सदाचार समिति में 19 दिसंबर 2025 को पहली पेशी और 6-7 जनवरी 2026 को दूसरी पेशी हुई। तीनों ने आरोप खारिज कर वीडियो को "डॉक्टर्ड" और "राजनीतिक साजिश" बताया। ऋतु बनावत ने CBI जांच की मांग की।
वर्तमान स्थिति (मार्च 2026 तक)
मामला अभी जांच के अधीन है। सदाचार समिति ने सुनवाई पूरी कर ली है, लेकिन अंतिम रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं हुई। उच्च स्तरीय कमेटी की रिपोर्ट भी लंबित है। अगर दोष सिद्ध हुआ तो तीनों विधायकों की सदस्यता पर संकट मंडरा सकता है।