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नागौर: 16 साल में पीएम मोदी को सुनाया भजन, 23 में भाजपा का टिकट; जिला परिषद चुनाव में अनिल नागौरी की एंट्री

Mon, 19 Oct 2026 08:53 AM IST
नागौर ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नागौर

सार

राजस्थान के नागौर जिला परिषद चुनाव में भाजपा ने वार्ड नंबर 37 से 23 वर्षीय युवा भजन गायक अनिल नागौरी को प्रत्याशी बनाया है। अनिल वर्ष 2019 में, 16 साल की उम्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात कर उन्हें भजन सुनाने को लेकर चर्चा में रहे थे।
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अनिल नागौरी - फोटो अमर उजाला - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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राजस्थान के नागौर में जिला परिषद चुनाव के बीच भाजपा ने वार्ड नंबर 37 से 23 वर्षीय युवा भजन गायक अनिल नागौरी को मैदान में उतारा है। भजनों और धार्मिक कार्यक्रमों के मंच से पहचान बनाने वाले अनिल अब राजनीति के जरिए ग्रामीण क्षेत्रों की समस्याओं को उठाने और उनके समाधान के लिए काम करने का दावा कर रहे हैं। वर्ष 2019 में, महज 16 साल की उम्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात कर उन्हें भजन सुनाने का अनुभव भी उनकी पहचान का खास हिस्सा है। अब भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ रहे अनिल सड़क, शिक्षा, शुद्ध पेयजल, रोजगार और मोबाइल नेटवर्क जैसी बुनियादी सुविधाओं को अपनी प्राथमिकताओं में गिना रहे हैं। पिता जसमत सिंह इंदलिया के राजनीतिक अनुभव और पार्टी के समर्थन के सहारे वह मतदाताओं का विश्वास जीतने की कोशिश में जुटे हैं। ऐसे में सवाल है कि क्या भजनों के मंच पर पहचान बनाने वाला यह युवा चेहरा अपनी लोकप्रियता को वोटों में बदल पाएगा?

16 साल की उम्र में प्रधानमंत्री मोदी से मुलाकात, सुनाया था भजन

अनिल नागौरी के मुताबिक, वर्ष 2019 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात के दौरान उन्होंने उनसे अपना परिचय दिया था। अनिल का कहना है कि प्रधानमंत्री ने उनसे उनका नाम और काम पूछा। जब उन्होंने बताया कि वह भजन गाते हैं, तो प्रधानमंत्री ने उनसे भजन सुनाने के लिए कहा।

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अनिल के मुताबिक, उन्होंने प्रधानमंत्री को भजन सुनाया था। इस दौरान उन्होंने नरेंद्र मोदी पर आधारित अपना गीत ‘भारत का सच्चा चौकीदार’ भी प्रस्तुत किया। वह इस मुलाकात को अपने जीवन के यादगार अनुभवों में से एक मानते हैं।
अब वही युवा भजन गायक भाजपा के टिकट पर नागौर जिला परिषद के वार्ड नंबर 37 से चुनाव लड़ रहा है। उनकी उम्मीदवारी ने चुनावी मुकाबले में एक युवा और सांस्कृतिक क्षेत्र में पहचान रखने वाले चेहरे को सामने ला दिया है।

संगीत के मंच से सियासत तक का सफर, राजनीति में क्यों आए अनिल?

अनिल नागौरी का कहना है कि वह बचपन से ही भजनों और धार्मिक कार्यक्रमों के माध्यम से लोगों के बीच रहे हैं। इस दौरान उन्हें लोगों का स्नेह और समर्थन मिला। अब वह इसी जुड़ाव को जनसेवा का माध्यम बनाना चाहते हैं।

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अनिल अपने राजनीतिक सफर में पिता जसमत सिंह इंदलिया के मार्गदर्शन को महत्वपूर्ण बताते हैं। उनके अनुसार, उनके पिता लंबे समय से राजनीति में सक्रिय रहे हैं। उन्होंने राजनीतिक गतिविधियों, जनसंपर्क और संघर्ष को करीब से देखा है। अनिल का मानना है कि जनता ने उन्हें बचपन से प्यार दिया है और अब वह लोगों की समस्याओं को समझकर उनके समाधान के लिए काम करना चाहते हैं।

सड़क, शिक्षा, पानी और रोजगार पर रहेगा जोर

चुनाव जीतने पर अपनी प्राथमिकताओं के बारे में अनिल नागौरी ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं को मजबूत करना उनका लक्ष्य होगा। चुनाव प्रचार के दौरान सामने आई सड़क संबंधी परेशानियों का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि कुछ जगहों पर सड़क नहीं होने के कारण वाहनों को पीछे छोड़कर रेत के टीलों तक जाना पड़ा। उनके मुताबिक, यह स्थिति ग्रामीण इलाकों में सड़क संपर्क की चुनौतियों को दिखाती है। वह सड़क, शिक्षा, शुद्ध पेयजल और रोजगार जैसे मुद्दों पर काम करने की बात कह रहे हैं। अब देखना होगा कि चुनाव जीतने की स्थिति में वह इन समस्याओं के समाधान के लिए किस तरह की पहल कर पाते हैं।

लाड़िया गांव में मोबाइल नेटवर्क की समस्या को बताया बड़ा मुद्दा

अनिल नागौरी ने लाड़िया गांव में मोबाइल नेटवर्क की समस्या को भी प्रमुख मुद्दा बताया। उनका कहना है कि चुनाव प्रचार के दौरान वह वहां करीब दो घंटे तक रुके, लेकिन इस दौरान मोबाइल नेटवर्क नहीं मिला और फोन करने में परेशानी हुई। अनिल ने कहा कि यदि जनता उन्हें चुनती है तो वह इस समस्या को दूर करने और नेटवर्क टावर लगवाने की दिशा में प्रयास करेंगे। ग्रामीण क्षेत्रों में मोबाइल नेटवर्क की उपलब्धता शिक्षा, डिजिटल सेवाओं और आपातकालीन संपर्क के लिहाज से भी महत्वपूर्ण है। ऐसे में यह मुद्दा चुनाव के दौरान मतदाताओं के बीच चर्चा का विषय बन सकता है।

भाजपा से जुड़ाव की वजह क्या है?

भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ रहे अनिल नागौरी का कहना है कि उनका परिवार लंबे समय से पार्टी से जुड़ा रहा है। उन्होंने टिकट देने के लिए पार्टी का आभार जताते हुए कहा कि वह भाजपा के साथ आगे बढ़कर जनसेवा करना चाहते हैं। संगीत और सांस्कृतिक गतिविधियों से जुड़े रहने के कारण कलाकारों को प्रोत्साहन देना भी उनके लिए महत्वपूर्ण विषय है। हालांकि, चुनाव में उनकी पहचान और पार्टी का समर्थन कितना प्रभावी साबित होगा, यह मतदाताओं के रुख पर निर्भर करेगा।

युवाओं को दिया मेहनत और पढ़ाई का संदेश

अनिल नागौरी ने युवाओं से लगातार मेहनत करने और शिक्षा पर विशेष ध्यान देने की अपील की। उनका कहना है कि निरंतर प्रयास और पढ़ाई के जरिए सफलता हासिल की जा सकती है। उन्होंने अपने संघर्ष का जिक्र करते हुए कहा कि बचपन से कठिनाइयों का सामना करते हुए वह आगे बढ़े हैं। इसलिए युवाओं को चुनौतियों से घबराने के बजाय उनका सामना करना चाहिए। अनिल का यह संदेश उनके उस सफर से भी जुड़ा है, जिसमें वह संगीत के मंच से चुनावी राजनीति तक पहुंचे हैं।

वार्ड 37 में किन गांवों और मुद्दों पर रहेगी नजर?

नागौर जिला परिषद के वार्ड नंबर 37 में श्री बालाजी, ब्रह्मपुरी कर्मसोता, गोरेरा, सुरजाना, सेवड़ी, हनुमान नगर, सथेरण, पींपासर और छीला सहित कई गांव शामिल बताए गए हैं। इन क्षेत्रों में सड़क, पेयजल, शिक्षा, रोजगार और मोबाइल नेटवर्क जैसी समस्याएं मतदाताओं के लिए अहम हो सकती हैं।
अनिल नागौरी की उम्मीदवारी तीन वजहों से चर्चा में है। पहली, भाजपा ने कम उम्र के युवा चेहरे को मौका दिया है। दूसरी, भजनों के जरिए उनकी पहचान पहले से बनी हुई है। तीसरी, अब उन्हें अपनी लोकप्रियता को स्थानीय समस्याओं और विकास के मुद्दों से जोड़ना होगा। हालांकि, किसी कलाकार की लोकप्रियता और चुनावी जीत के बीच का अंतर भी महत्वपूर्ण है। मतदाता यह देखेंगे कि प्रत्याशी के पास विकास का क्या रोडमैप है और वह स्थानीय समस्याओं के समाधान के लिए कितनी प्रभावी पहल कर सकता है।

 

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