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आरक्षण पर फिर संग्राम, रेलवे ट्रैक पर बैठे गुर्जर, कई ट्रेनें रुकीं

Fri, 08 Feb 2019 05:30 PM IST
अनिल पांडेय न्यूज डेस्क, सवाईमाधोपुर
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राजस्थान में गुर्जर आंदोलन
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एक बार फिर सरकार के खिलाफ गुर्जर आंदोलन शुरू हो गया है। गुर्जर समुदाय के लोग आरक्षण की मांग को लेकर सवाई माधोपुर के पास ट्रैक पर बैठ गए हैं। गुर्जर समाज द्वारा आरक्षण के लिए दी गई समय सीमा खत्म होने के बाद किरोड़ी सिंह बैंसला ने रेलवे ट्रैक पर बैठने का एलान किया है। बैंसला ने कहा कि वह खुद सबसे आगे रहेंगे जबकि युवा पीछे रहेंगे। उन्होंने कहा कि यह प्रदर्शन शांति पूर्ण तरीके से किया जाएगा। 

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इसके बाद रेलवे ने दिल्ली-मुंबई रेल ट्रेक पर ट्रेनों को रोक दिया है। यह एलान सवाई माधोपुर के मलारना डूंगर में चौहानपुरा-मकसूदनपुरा में देवनारायण मंदिर पर महापंचायत के दौरान लिया गया है। वहीं सवाई माधोपुर गंगानगर में भी ट्रेनों को आगे जाने से रोक दिया गया है। 

बता दें कि गुर्जर समाज की ओर से शुक्रवार से आरक्षण आंदोलन के आह्वान को देखते हुए राजस्थान के 14 जिलों में पहले ही हाई अलर्ट कर दिया गया है। गुर्जर आरक्षण संघर्ष समिति के संयोजक कर्नल किरोड़ी सिंह बैंसला ने राजस्थान सरकार को ‘अबकी बार, आखिरी बार’ के नारे के साथ आंदोलन की चेतावनी दी हुई है।

सुरक्षा के लिहाज से मुख्य सचिव डीबी गुप्ता ने डीजीपी कपिल गर्ग को गुर्जर बाहुल्य क्षेत्रों में विशेष निगरानी रखने के आदेश दिए हैं और सवाई माधोपुर रेलवे ट्रैक पर विशेष सुरक्षा व्यवस्था करने के लिए कहा है। 

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बैठक के बाद जयपुर, दौसा, करौली, भरतपुर, धौलपुर, अलवर, टोंक, सवाईमाधोपुर, कोटा, झालावाड़, बूंदी, भीलवाड़ा, अजमेर, राजसमंद जिलों एवं आस-पास के क्षेत्रों में पुलिस को अलर्ट कर दिया गया है। बैंसला ने आर-पार की लड़ाई का हवाला देते हुए समाज से अधिक से अधिक संख्या में आंदोलन में शामिल होने की अपील की है।

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  • गुर्जरों ने 3 दिसंबर 2006 को आरक्षण की मांग को लेकर हिंडौन रेलवे स्टेशन पर आंदोलन किया था।
  • 3 अक्टूबर 2006 को गुर्जर टाइगर फोर्स ने आरक्षण के लिए लड़ाई लड़ी। 
  • 29 मई 2007 को पोटली में चक्का जाम किया। इस दौरान हिंसा में एक पुलिसकर्मी सहित 5 लोगों की मौत हो गई थी। 
  • 23 जून 2007 को ही आरक्षण की मांग को लेकर राजस्थान के पुष्कर में महापंचात आयोजित की गई।
  • 27 सितंबर 2007 को गुर्जर आंदोलन के चलते गुर्जर दूधियों ने विरोध में दूध बेचना ही बंद कर दिया था।  
  • 2 अक्टूबर 2007 को कर्नल बैंसला ने भरतपुर में जेल भरो आंदोलन का आह्वान किया था। 
  • 5 अक्टूबर 2007 को डुमरिया और फतेहसिंगपुरा के बीच रेलवे ट्रैक हटा दिया गया था।
  • 2 मार्च 2008 को खेड़ली में महापंचायत की गई थी। 
  • 23 मई 2008 को पीलूपुरा में रेल रोको आंदोलन किया गया। इसके बाद कुछ गुर्जरों ने रेल पटरी भी उखाड़ने की कोशिश की थी। पूरी तरह से रेल यातायात बाधित हो गया था। इस दौरान पुलिस ने 16 अलग-अलग स्थानों पर गोलीबारी की गई थी। यह प्रदर्शन दौसा जिले के सिकंदरा में हिंसक हो गया था। जिसके बाद पुलिस को मजबूर होना पड़ा था। इस दौरान 20 प्रदर्शनकारियों की मौत हो गई थी। जबकि एक पुलिसकर्मी भी घायल हो गया था।  
  • 24 मई 2008 को राजस्थान सरकार ने कर्नल बैंसला के नेतृत्व में गुर्जरों के नेताओं से बातचीत के लिए निमंत्रण दिया था।
  • 9 जून 2008 को गुर्जर प्रतिनिधियों और सरकार के प्रतिनिधियों के बीच वार्ता हुई। जयपुर में 13 और 14 जून, 2008 को दूसरे और तीसरे दौर की वार्ता हुई। कर्नल बैंसला 16 और 17 जून, 2008 को चौथे और पांचवें दौर की बातचीत में शामिल हुए थे।
  • 22 अगस्त 2008 को गुर्जर महापंचायत ने विधानसभा में पारित आरक्षण विधेयक को लागू करने का आह्वान किया, जिसमें गुर्जरों, गादिया लुहारों, रेबारी और बंजारों को 5% आरक्षण और आर्थिक रूप से पिछड़े वर्गों को 14% आरक्षण दिया गया।
  • 10 जून 2009 को महारवार महापंचायत ने सरकार को अल्टीमेटम दिया।
  • 26 जुलाई 2009 को कर्नल बैंसला के नेतृत्व में टोडाभीम के पेंचला गांव में महापंचायत का आयोजन किया गया।
  • 26 मार्च 2010 को कर्नल बैंसला ने विशेष आरक्षण पर राजस्थान उच्च न्यायालय के फैसले की प्रतीक्षा किए बिना 80,000 पदों पर भर्ती के लिए सरकार के निर्णय का विरोध करने के लिए पुष्कर में महापड़ाव की घोषणा की।
  • 5 मई 2010 को कर्नल बैंसला सरकार के साथ समझौते करने पहुंचे। सरकार 50% आरक्षण कोटे के भीतर विशेष पिछड़े वर्ग की श्रेणी में गुर्जरों को 1% आरक्षण देने पर सहमत हुए जबकि शेष 4% आरक्षण को अदालत के फैसले तक रोक दिया गया था।
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