राजस्थान में कई सीटें ऐसी हैं, जिन पर प्रदेशवासियों की उसी तरह से नजरें गढ़ी हुई हैं, जिस तरह खुद की विधानसभा सीट पर।
1. सरदारपुर- अशोक गहलोत vs शंभू सिंह खेतारसर
राजस्थान के लिए यह सीट इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि यहां से राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत चुनाव लड़ रहे हैं। इस सीट पर परिणाम बदलेगा, तो बड़ी घटना ही माना जाएगा।
पिछले चुनाव में गहलोत 15340 वोटों से जीते हैं। पिछले बार भाजपा ने अशोक गहलोत के सामने उनकी ही जाति के राजेन्द्र गहलोत को उतारा था, लेकिन इस बार भाजपा शंभू सिंह खेतासर को आजमा रही है, जो राजपूत समाज से हैं।
इस सीट पर माली और राजपूत मतदाता काफी तादात में है। भाजपा ने इस सीट पर मुकाबले को थोड़ा रोचक बनाने का प्रयास किया है।
हालांकि गहलोत की जीत का अंतर पिछले चुनावों से लगातार घट रहा है। वर्ष 1999 में वे 49280 के बड़े अंतर से जीते थे। वर्ष 2003 में यह अंतर घटकर 18991 रह गया था।
2. झालरापाटन- वसुंधरा राजे vs मीनाक्षी चन्द्रावत
इस सीट पर भाजपा की मुख्यमंत्री पद की उम्मीदवार वसुंधरा राजे की जबरदस्त प्रसिद्धी है। पिछले चुनाव में उन्होंने इस सीट से जीतकर अनेक विकास कार्य किए और कहा जाए कि तस्वीर काफी बदल भी दी।
कांग्रेस ने दो बार चुनाव हार चुकी मीनाक्षी चन्द्रावत को यहां से उतारा है। जाहिर है कि यहां के लोग वसुंधरा को विधायक के तौर पर नहीं मुख्यमंत्री के तौर पर मत देते हैं।
3. ओसियां- लीला मदेरणा vs भैरा राम सियोल
कांग्रेस के दिग्गज जाट नेता परसराम मदेरणा के लिए चर्चित रहनेवाली इस सीट को इस बार भंवरी देवी कांड के कारण अधिक जाना जा रहा है।
परसराम के पुत्र पूर्व जल संसाधन मंत्री भंवरी देहशोषण व हत्या के आरोप में जेल में बंद हैं और कांग्रेस ने टिकट उनकी पत्नी लीला मदेरणा को दिया है।
इस सीट पर इस परिवार की काफी पकड़ है। भाजपा ने जाट वोट बैंक को तोडऩे के लिए भैरा राम को मैदान में उतारा है। यहां उन्हें राजपूत और विश्नोई जाति का खासा सहयोग मिलेगा।
4. लूणी- अमरी देवी vs जोगाराम पटेल
भंवरी देवी कांड के बाद से ही यह सीट चर्चा में हैं। भंवरी देवी देहशोषण व हत्या कांड के आरोप में जेल में बंद विधायक मलखान सिंह की 80 वर्षीय मां अमरी देवी को टिकट दिया है।
यहां इस परिवार को विश्नोई समाज का एक तरफा सहयोग मिलता रहा है। भाजपा ने जोगा राम पटेल को टिकट दिया है। अब मुकाबला रोचक होगा। देखना यह है कि जेल में बंद मलखान सिंह की मां इस सीट को बचा पाती है या नहीं।
5. मंडावा- चन्द्रभान vs सलीम तंवर
इस सीट को लेकर कांग्रेस में घमासान मचा हुआ है। यहां से कांग्रेस विधायक रीटा चौधरी का टिकट काटकर कांग्रेस ने प्रदेश अध्यक्ष चन्द्रभान को उतारा है।
ऐसे में रीटा ने निर्दलीय के रूप में उनके खिलाफ खड़ी हैं, इससे कांग्रेस को सीधा नुकसान है। हालांकि इस आपसी खींचतान का फायदा भाजपा के उम्मीदवार सलीम तंवर को हो रहा है।
इस सीट पर एक रोचक त्रिकोणीय मुकाबला देखने को मिलेगा।
6. डीग-कुम्हेर- दिगम्बर सिंह vs विश्वेन्द्र सिंह
पिछले विधानसभा चुनाव की तरह ये सीट भी इस बार काफी हॉट है। पिछली बार भाजपा से टिकट लेकर दिगम्बर सिंह ने कांग्रेस की टिकट पर लड़े भरतपुर राजघराने के तालुल्क रखने वाले विश्वेन्द्र सिंह को हराया था।
हालांकि टक्कर उस समय भी कांटे की थी। इस बार भी दोनों एक-दूसरे को तगड़ी टक्कर दे रहे हैं।
7. बीकानेर पश्चिम- बी.डी. कल्ला vs गोपाल कृष्ण जोशी
राजस्थान की जनता को इस सीट से कड़ा और कांटे का मुकाबला देखने को मिलेगा। कांग्रेस के बड़े नेता बी.डी. कल्ला और भाजपा के गोपाल कृष्ण जोशी के बीच होने वाले मुकाबले में कौन जीतेगा यह तय करना ही जोखिम का काम है।
इधर, बीकानेर पूर्व से कांग्रेस ने गोपाल गहलोत को तो भाजपा ने पिछली बार जीती हुई विधायक सिद्धी कुमारी हैं, जो राजपरिवार से ताल्लुक रखती हैं।
7. सवाईमाधोपुर- दिया कुमारी vs दानिश अबरार
इस सीट पर राजपा के किरोड़ी लाल मीणा ने रोचक त्रिकोणीय मुकाबला तैयार कर दिया है। यहां मीणा वोट बैंक का प्रभाव है, जिस पर किरोड़ी बड़ी सैंध मारेंगे।
भाजपा की टिकट पर जयपुर राजघराने से ताल्लुक रखने वाली दिया कुमारी पहली बार चुनावी मैदान में हैं। उनके सामने कांग्रेस की टिकट लेकर पूर्व केंद्रीय मंत्री दिवंगत अबरार अहमद के पुत्र दानिश अबरार हैं।
9. कोलायत- देवी सिंह भाटी vs भंवर सिंह भाटी
दिग्गज राजपूत नेता माने जाने वाले देवी सिंह भाटी यहां से वर्ष 1980 से लगातार चुनाव जीतते आए हैं और उनकी इसी मिट्टी पकड़ पहलवान की छवि के चलते भाजपा के पास टिकट जारी करने के लिए कोई दूसरा नाम ही नहीं था। कांग्रेस ने उनके सामने भंवर सिंह भाटी को उतारा है, जिससे राजपूत वोटों में सेंध लग सके।