राजस्थान के स्वास्थ्य मंत्री परसादी लाल मीणा हाल ही में अपने ही विभाग की कमियां गिनाते हुए नजर आए। उन्होंने कहा कि सिफारिश के जरिए डॉक्टर्स और नर्स कर्मचारियों के एक ही जगह बने रहने से दूर-दराज इलाकों के हालात बहुत खराब है। स्टाफ होने के बाद भी अस्पताल खाली पड़े हैं।
उन्होंने कहा कि मैं विधायकों से हाथ जोड़कर प्रार्थना करता हूं कि आप सिफारिश के लिए मुझ पर दबाव न बनाए, क्योंकि मैं आपकी बात मानने वाला नहीं हूं। अस्पताल में अगर छह डॉक्टर की पोस्ट है तो सातवां मत मांगना। सातवां वहीं जाएगा जहां उसकी तैनाती की गई है। काम कहीं और करें और वेतन कहीं और से ले, ये कोई तरीका नहीं होता है।
मंत्री मीणा ने कहा कि हम तो फकीर हैं भाई, किसी की परवाह नहीं है। उन्होंने कहा कि हम सिर्फ इतना चाहते हैं कि जिस डॉक्टर को जहां तैनात किया गया है, वह वहां काम करे और में ऐसा कर के रहूंगा। खाली पड़े अस्पताल में डॉक्टर और एनएम भेजे जाएंगे, कोई सिफारिश नहीं चलेगी।
मंत्री ने दी कार्रवाई की चेतावनी
परसादीलाल मीणा ने एक कहा कि विराटनगर के विधायक एक दिन मेरे पास आए और बताया कि मेरे पांच डॉक्टर विराटनगर से सीएमएचओ फर्स्ट ने लगा रखे हैं। हमने जानकारी ली तो पता चला कि पांच नहीं 70 डॉक्टर बैठे हुए थे। इसके बाद सभी को वहां से रिलीव करवाया। उन्होंने कहा कि अधिकारियों ने सरकार को जानकारी दिए बिना ही डेपुटेशन कर रखे हैं। अब अगर कोई भी अधिकारी अपनी मर्जी से ऐसा करेगा तो 16 सीसी की चार्जशीट दी जाएगी।
छह सीएचसी में और 200 पीएचसी में डॉक्टर नहीं
मंत्री मीणा ने कहा कि 2000 एएनएम सरप्लस हैं और 1700 सब सेंटर्स पर ताले पड़े हैं। हम सभी को वापस भेजा जाएगा। उन्होंने कहा मैंने ऐसे कम्यूनिटी हेल्थ सेंटर्स (सीएचसी) देखी है जहां एक भी डॉक्टर मौजूद नहीं हैं। छह सीएचसी और 200 प्राइमरी हेल्थ सेंटर्स (पीएचसी) ऐसी हैं जहां डॉक्टर नहीं हैं। यह बड़ी चिंता की बात है। उन्होंने कहा कि सरकार ने राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन (एएनएम) में 12000 एएनएम हैं और इतने ही और भर्ती कर लिए हैं। एएनएम के बिना 1700 सब सेंटर फिर भी खाली पड़े हैं। पता नहीं ये कहां काम कर रहे हैं, अब इन्हें बंद पड़े सेंटर पर तैनात किया जाएगा।
अपनों पर निशाना
मंत्री परसादीलाल मीणा ने प्रदेश में खाली पड़े अस्पतालों, डॉक्टर और नर्स कर्मचारियों की तैनाती पर जवाब देकर स्वास्थ्य विभाग की सच्चाई सामने ला दी। इससे पूर्व मंत्री रघु शर्मा की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो गए हैं। मंत्री मीणा का बयान अपनों पर ही निशाना माना जा रहा है।