कोटपूतली नगर परिषद सभापति की कुर्सी पर फैसला होने से पहले ही कोटपूतली की सियासत में नया मोड़ आ गया है। वार्ड नंबर 48 के पार्षद देशराज गुर्जर के तीन दिन से कथित तौर पर लापता होने की सूचना ने राजनीतिक माहौल गरमा दिया। शुक्रवार को सैकड़ों ग्रामीण और कांग्रेस कार्यकर्ता एकजुट होकर पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुंचे। लोगों ने विरोध जताते हुए एसपी सत्यवीर सिंह को ज्ञापन सौंपा और पार्षद को जल्द तलाशने की मांग की।
मामले ने उस समय और तूल पकड़ लिया, जब पूर्व विधायक एवं पूर्व संसदीय सचिव रामस्वरूप कसाना भी समर्थकों के साथ एसपी कार्यालय पहुंचे। उन्होंने आरोप लगाया कि देशराज गुर्जर पिछले तीन दिनों से लापता हैं और उन्हें लेकर परिजन व समर्थक चिंतित हैं। कसाना ने भाजपा से जुड़े लोगों पर गंभीर आरोप लगाते हुए राजनीतिक दबाव की आशंका जताई। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
'कल तक नहीं मिला तो सभापति चुनाव नहीं होने देंगे'
प्रदर्शन के दौरान रामस्वरूप कसाना ने सीधे तौर पर सभापति चुनाव को लेकर चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि यदि शनिवार तक पार्षद देशराज गुर्जर का पता नहीं लगाया गया तो सभापति का चुनाव नहीं होने दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ी तो समाज और क्षेत्र के लोग एकजुट होकर बड़ा विरोध करेंगे। इस चेतावनी के बाद सभापति चुनाव को लेकर पहले से चल रही राजनीतिक सरगर्मियों के बीच नया विवाद खड़ा हो गया है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि देशराज गुर्जर कहां हैं और उनके लापता होने की वास्तविक स्थिति क्या है।
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एसपी बोले- परिवार ने अब तक नहीं दी शिकायत
इधर, पुलिस अधीक्षक सत्यवीर सिंह ने मामले में पुलिस रिकॉर्ड की स्थिति साफ की। उन्होंने कहा कि अभी तक पार्षद के परिवार की ओर से पुलिस के पास कोई शिकायत या आवेदन नहीं दिया गया है। शुक्रवार को एसपी कार्यालय पहुंचे ग्रामीणों और कार्यकर्ताओं ने पार्षद के तीन दिन से लापता होने की जानकारी दी है। एसपी ने कहा कि लोगों से मिली जानकारी के आधार पर पुलिस मामले की पड़ताल करेगी। तथ्यों की जानकारी जुटाकर नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
एक पार्षद की तलाश और दांव पर सभापति की कुर्सी
देशराज गुर्जर के लापता होने की सूचना ऐसे समय सामने आई है, जब कोटपूतली नगर परिषद में सभापति चुनाव को लेकर राजनीतिक जोड़तोड़ का दौर चल रहा है। ऐसे में एक पार्षद का अचानक सामने नहीं होना चुनावी समीकरणों के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
फिलहाल, पुलिस के पास परिवार की ओर से कोई औपचारिक शिकायत नहीं पहुंची है। ग्रामीणों के आरोप, पूर्व संसदीय सचिव की चेतावनी और पुलिस की स्थिति—इन तीनों के बीच अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि देशराज गुर्जर आखिर कहां हैं? पुलिस की जांच के बाद ही पूरे मामले की वास्तविक तस्वीर साफ हो सकेगी।