राजस्थान के कोटा जिले में पुलिस कार्यप्रणाली को लेकर एक गंभीर मामला सामने आया है। ग्रामीण क्षेत्र के चेचट थाना में तैनात सीआई सुरेंद्र सिंह बिश्नोई और कांस्टेबल महावीर पर एक मामले को दबाने और अस्पताल संचालक से करीब 7 लाख रुपये लेने के आरोप लगे हैं। मामले की जांच के बाद ग्रामीण एसपी ने दोनों को लाइन हाजिर कर दिया है और रिपोर्ट मुख्यालय भेज दी गई है।
नाबालिग से जुड़ा है मामला
जानकारी के अनुसार, कोटा ग्रामीण इलाके के एक गांव से कुछ समय पहले एक लड़का नाबालिग लड़की को लेकर चला गया था। परिजनों की शिकायत पर थाने में मामला दर्ज किया गया। पुलिस ने कुछ दिनों बाद दोनों को दस्तयाब कर लिया, लेकिन जांच पूरी नहीं हो सकी। इस दौरान सामने आया कि दोनों एक अस्पताल गए थे, जहां गर्भपात कराया गया।
गर्भपात को लेकर उठे कानूनी सवाल
जांच में यह सामने आया कि गर्भपात डॉक्टर आजाद द्वारा किया गया, जबकि नाबालिग का गर्भपात करना गैरकानूनी माना जाता है। यह भी आरोप है कि गर्भपात से पहले आवश्यक दस्तावेज नहीं लिए गए। इस बिंदु ने मामले को और गंभीर बना दिया और जांच का दायरा बढ़ गया।
पुलिस पर रिश्वत मांगने और दबाव बनाने के आरोप
आरोपों के अनुसार, चेचट थाना अधिकारी सुरेंद्र सिंह ने डॉक्टर को पूछताछ के लिए बुलाया, लेकिन गिरफ्तारी नहीं की। इसके बाद कांस्टेबल महावीर पर आरोप लगा कि उन्होंने मामले को निपटाने के बदले 8 लाख रुपये की मांग की। यह भी कहा गया कि डॉक्टर को धमकी दी गई कि पैसे नहीं देने पर अस्पताल का लाइसेंस रद्द कर दिया जाएगा और जेल भेज दिया जाएगा।
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लेन-देन और बयान में सामने आई बातें
बताया गया कि डॉक्टर ने 7 लाख रुपये देने की सहमति जताई, जिसके बाद कांस्टेबल महावीर उन्हें कार से एक होटल ले गए और वहां 6 लाख 50 हजार रुपये लिए गए। शेष 50 हजार रुपये थाने के स्वागत कक्ष में लिए जाने की बात सामने आई है। इस मामले में रामगंजमंडी सीओ द्वारा डॉक्टर आजाद के बयान लिए गए, जिनमें कथित रूप से यह स्वीकार किया गया कि पैसे लेकर मामले को दबाने की बात हुई थी।
जांच के बाद विभागीय कार्रवाई
पूरी जांच के बाद संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए उन्हें लाइन हाजिर कर दिया गया। साथ ही जांच रिपोर्ट उच्च स्तर पर भेज दी गई है। इस घटनाक्रम ने पुलिस व्यवस्था और कार्यप्रणाली को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।