प्रदेश में चल रहे राइट टू हेल्थ बिल के विरोध के बीच मुख्यमंत्री अशोक गहलोत का एक बयान सामने आया है। सीएम गहलोत ने एक बार फिर आरएसएस को अपना निशाना बनाया है। गहलोत का दावा है कि प्रदेशभर मरीजों की परेशानी की वजह न तो राइट टू हेल्थ बिल है और न ही राज्य सरकार। उन्होंने कहा कि मरीजों की परेशानी के वजह आरएसएस का धड़ा है जो इस समय प्रदेश में सक्रिय है। उनका दावा है राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से जुड़े चार-पांच लोग दिल्ली से राजस्थान में आए हुए हैं और यही लोग प्रदेश की जनता को गुमराह करने का काम रहे हैं।
सीएम गहलोत ने चिकित्सकों से हड़ताल खत्म करने की अपील करते हुए कि डॉक्टरों में ही कुछ आरएसएस के लोग शामिल हैं जो लोगों को भड़का रहे हैं। गहलोत ने कहा कि डॉक्टरों द्वारा वित्त सचिव को दी गई सिफारिशों पर सभी सहमत थे, लेकिन बाद में आरएसएस से जुड़े कुछ चार-पांच डॉक्टरों ने आपत्ति जताई। यह आरोप नहीं बल्कि सच्चाई है।
सीएम का दावा दो लोग दिल्ली से आए
मुख्यमंत्री ने दावा किया कि दो लोग दिल्ली से आए और उनसे मिलने के लिए कहा गया। गहलोत ने कहा कि जब उन्हें वित्त सचिव अखिल अरोड़ा के पास भेजा गया तो वे सचिव से मिलने के बजाय, दोनों राज्यपाल के पास चले गए। वे यहां चिकित्सकों को गुमराह करने के बाद दिल्ली लौट गए। मुख्यमंत्री गहलोत ने चिकित्सकों की हड़ताल के बारे में कहा कि विधेयक के तहत लोगों को 25 लाख रुपये तक की मुफ्त स्वास्थ्य सेवाएं पाने का अधिकार दिया गया है और सरकार इलाज का भुगतान करेगी।