कोटा के न्यू मेडिकल कॉलेज अस्पताल की सुपर स्पेशलिटी विंग में इलाज के दौरान एक और प्रसूता की मौत हो गई। बारां जिले के शाहाबाद क्षेत्र स्थित हाड़ोता भील निवासी धूल सिंह की पुत्री रेशु की सोमवार-मंगलवार की दरमियानी देर रात जान चली गई। महिला का 13 अक्तूबर को जेके लोन अस्पताल में प्रसव हुआ था, जहां पेट में ही बच्चे की मौत हो गई थी। इसके बाद महिला की तबीयत बिगड़ती चली गई और उसे न्यू मेडिकल कॉलेज अस्पताल में भर्ती कराया गया था।
जेके लोन अस्पताल में बिगड़ी तबीयत
मृतका की बहन ने बताया कि प्रसव के बाद रेशु की हालत में कुछ सुधार हुआ था। वह बातचीत कर रही थी और पैदल चलकर शौच के लिए भी जा रही थी। हालांकि, बच्चे की मौत के बाद उसका पेशाब बंद हो गया और पेट में तेज दर्द होने लगा। चिकित्सकों ने जांच के बाद उसकी किडनी खराब होने और पेशाब रुकने की बात कही। इसके बाद इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। पुलिस ने महिला के शव का पोस्टमार्टम करवाकर परिजनों को सौंप दिया है और मामले की जांच शुरू कर दी है। मृतका की बहन ने आरोप लगाया कि गरीब परिवार होने के बावजूद एंबुलेंसकर्मी शव ले जाने के लिए पैसे मांग रहे हैं।
छबड़ा निवासी शबनम बानो ने भी तोड़ा दम
इससे पहले, बारां जिले के छबड़ा निवासी 26 वर्षीया प्रसूता शबनम बानो ने भी जेके लोन अस्पताल में शनिवार रात दम तोड़ दिया। उसके भाई सरफराज के अनुसार, 22 अक्तूबर को उसे बारां के सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। 23 अक्तूबर को ऑपरेशन की बात कहकर रात से खाना-पीना बंद करवा दिया गया, लेकिन 12 घंटे तक ऑपरेशन नहीं हुआ। शाम करीब सात बजे ड्रिप चढ़ाने के बाद उसे दौरे पड़ने लगे, जिसके बाद उसे कोटा रेफर कर दिया गया। जेके लोन अस्पताल में सिजेरियन प्रसव के दौरान उसने बच्ची को जन्म दिया, लेकिन रक्तचाप कम होने के कारण उसे वेंटिलेटर पर रखा गया और शनिवार रात दस बजे उसकी मौत हो गई। जेके लोन अस्पताल की अधीक्षक डॉ. निर्मला शर्मा ने बताया कि महिला को कोमा की हालत में लाया गया था।
मई महीने में भी बिगड़ी थी प्रसूताओं की हालत
कोटा के अस्पतालों में सिजेरियन ऑपरेशन के बाद प्रसूताओं की मौत के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। इस महीने 16 से 23 अक्तूबर के बीच तीन प्रसूताओं की मौत हुई थी। अब 27 अक्तूबर को एक और प्रसूता की मौत के बाद इस माह मृतक प्रसूताओं की संख्या बढ़कर चार हो गई है। इससे पहले 5 से 7 मई के बीच भी सिजेरियन के बाद 12 प्रसूताओं की किडनी खराब हो गई थी। इनमें से मई महीने में पायल, ज्योति, प्रिया, पिंकी और शिरीन की मौत हो गई थी। सात अन्य प्रसूताओं की किडनी फेल होने के बाद उनका इलाज चला और अब भी उनका नियमित अंतराल पर डायलिसिस हो रहा है।