गोवर्धन पर्व पर हर साल की तरह इस बार भी केकड़ी शहर पटाखों की चपेट में हैं। मुख्य बाजारों और इससे जुड़ी गलियों, मोहल्लों में एक दूसरे पर पटाखे जला जला कर फेंके जा रहे हैं। पटाखेबाजी का आलम यह है कि किसी युद्ध की तरह मोर्चाबंदी कर एक फव्वारेदार पटाखे को शस्त्र की तरह इस्तेमाल कर युवाओं की टोलियों ने शहर को अंगारों व धुंए के गुबार में गुम कर दिया। कई जगह आग लगने की भी सूचनाएं है। बाईपास पर पांच ट्रॉली चारा जल गया, वहीं बाजार में एक स्कूटी में भी आग लग गई। कई लोगों के कपड़े जलने की सूचनाएं हैं। पटाखेबाजी में अब तक करीब तीन 55 लोगों के झुलसने की सूचना है।
कार में आग, लोग झुलसे
शहर के कृषि उपज मंडी क्षेत्र में हरि ऑयल मिल के पास छोटा घास भैरू निकालने के दौरान एक कार का ऑयल टैंक फूट गया और उसमें ऑयल लीक हो गया। इसी दौरान एक दूसरे के ऊपर फेंके जा रहे गंगा-जमुना नामक पटाखे से ऑयल ने आग पकड़ ली और देखते ही देखते कार धूं धूं कर जलने लगी। गनीमत रही कि कार सवार युवक समय रहते कार से उतर गए। आग लगने से कार पूरी जल गई। दूसरी ओर पटाखेबाजी को सख्ती से रोकने के बड़े-बड़े दावे कर रही पुलिस भी रात होने तक मौके पर से नदारद रही। अलबत्ता पुलिस जीप बाजारों में गश्त लगाती जरूर नजर आई, मगर उसमें बैठे पुलिसकर्मियों द्वारा पटाखे फेंकते तत्त्वों को रोकने का कोई जतन नहीं किया गया। शहर में पटाखे जलाकर फेंकने का सिलसिला इस बार सुबह 9 बजे से ही शुरू हो गया। शहर के गणेश प्याऊ, वीर चौराहा, कपड़ा बाजार, लोढ़ा चौक, राजपुरा रोड़, गुर्जरवाड़ा, कल्याण कॉलोनी आदि ऐसे कई इलाके हैं, जहां दिन भर से यह पटाखेबाजी चल रही है। जिला अस्पताल से प्राप्त जानकारी के अनुसार पटाखेबाजी से रात 9 बजे तक 55 लोग झुलस गए हैं, इनमें से एक को अजमेर रेफर किया गया है।
गौरतलब है कि इस पटाखेबाजी में गंगा-जमना व सीता-गीता नामक पटाखों का प्रयोग किया जाता है, जिसमें पहले अनार की तरह फव्वारा निकलता है और फिर वह तेज धमाके से फट जाता है। लोग इसे जलाकर फव्वारा निकलना शुरू होने तक हाथ में पकड़े रहते हैं, फिर निशाना लगाकर लोगों की तरफ फेंक देते हैं। दिन भर से चल रही अंगारों की यह होली अभी और तेज होने वाली है। बताया गया कि सदर बाजार में गणेश प्याऊ के यहां स्थापित घास भैरू की सवारी रात्रि साढ़े आठ बजे शुरू हो जाती है। यह सवारी खिड़की गेट, लोढ़ा चौक, चारभुजा मंदिर, सूरजपोल गेट, भैरू गेट, सरसडी गेट, अजमेरी गेट और घंटाघर होते हुए नगर परिक्रमा पूरी कर वापस गणेश प्याऊ पर सम्पन्न होगी। इस दौरान सवारी के पूरे रास्ते सबसे अधिक पटाखे फेंके जाते हैं।
38 करोड़ देवी देवता का वास
मान्यता है कि घास भैरू में 38 करोड़ देवी देवता का वास होता है। लोगों का विश्वास है कि घास भैरू की नगर परिक्रमा से नगर में वर्ष पर्यंत धन धान्य की कमीं नहीं रहती। पहले नगर परिक्रमा के दौरान घास भैरू को बैलों द्वारा खींचा जाता था, मगर फिर धीरे धीरे बैलों की जगह ट्रैक्टरों ने ले ली। अब घास भैरू को ट्रैक्टरों की बजाय लोग खुद खींचने लगे हैं। इसके लिए भारी संख्या में लोगों का हुजूम उमड़ता है, जो पटाखेबाजी की परवाह किये बगैर घास भैरू को रस्सों से खींचकर नगर परिक्रमा कराता है।
अन्नकूट का प्रसाद बांटा
इस बीच गोवर्धन पर्व के मौके पर शहर के विभिन्न मंदिरों में अन्नकूट का आयोजन किया गया। अन्नकूट महोत्सव के दौरान दोपहर में महिलाओं द्वारा मंदिरों में भजन कीर्तन किया गया तथा शाम को महाआरती कर भगवान के भोग लगाकर प्रसाद का वितरण किया गया। शहर के चारभुजा मंदिर में चारभुजा नाथ का मनमोहक श्रृंगार किया गया तथा आरती कर अन्नकूट का प्रसाद वितरण किया गया। इसी प्रकार ब्यावर रोड स्थित प्राचीन मंदिर केकडाधीश बालाजी मंदिर, देवगांव गेट स्थित छापरी के बालाजी, अजमेर रोड स्थित प्राचीन बिजासण माता मंदिर के पास हनुमान मंदिर, राजपुरा रोड स्थित शिव मंदिर, तीन बत्ती चौराहे पर तेलियान व खटीकान मंदिर व घंटाघर के समीप स्थित महादेव व लक्ष्मीनाथ मंदिर सहित कई मंदिरों में अन्नकूट के प्रसाद का भोग लगाकर प्रसाद का वितरण किया गया। जिसमें शहर के सैंकडों लोगों ने प्रसाद ग्रहण किया। इससे पूर्व मंदिरों में भक्तजनों की और से मंदिर पर भजनों की प्रतुतियां दी गई।