राजस्थान में जोधपुर के मथुरादास माथुर अस्पताल के डॉक्टरों ने एक गर्भवती महिला की सफल ओपन हार्ट सर्जरी कर एक साथ दो जानें बचाई। पश्चिमी राजस्थान का यह पहला मामला बताया जा रहा है। विश्व भर में ऐसे ऑपरेशंस में मरीज तथा उसके बच्चे दोनों के बचने के काफी कम मामले सामने आए हैं।
बता दें कि यह एक जटिल ऑपरेशन है, जो केवल हार्ट के टरशरी सेंटर्स पर ही संभव है। लेकिन अस्पताल के डॉ. सुभाष बलारा (विभागाध्यक्ष) और डॉ. अभिनव सिंह (सहायक आचार्य) ने महिला का सफल ऑपरेशन किया। मरीज तथा परिजनों ने अपने क्षेत्र में चिकित्सा परामर्श लिया। परंतु लाभ नहीं मिला और बीमारी बढ़ती गई। इस बीमारी को लेकर उसे मथुरादास माथुर अस्पताल के कार्डियोथोरेसिक विभाग के आईसीयू में गंभीर अवस्था (कार्डियोजेनिक शॉक) में भर्ती किया गया। जहां ऑक्सीजन सपोर्ट, ब्लड प्रेशर को बढ़ाने की दवाइयां, आईवी फ्लुएड्स और अन्य जरूरी दवाइयां शुरू कर दी गई, परंतु मरीज की हालत काफी नाजुक बनी हुई थी।
डॉ. सुभाष बलारा ने बताया कि ऐसी स्थिति में मरीज और उसके बच्चे को बचाना एक बेहद चुनौतीपूर्ण कार्य था। मरीज और उसके परिजनों की सहमति के बाद चिकित्सकों ने ओपन हार्ट सर्जरी का निर्णय लिया गया। इस ऑपरेशन को बाईपास मशीन पर किया गया, जिसमें मैकेनिकल वाल्व को रिप्लेस किया गया। ऑपरेशन के पश्चात मरीज को सीटीआईसीयू शिफ्ट किया गया। जहां चार दिन मरीज को रखने के बाद मरीज और उसके बच्चे की स्थिति सामान्य हो गई।
वाल्व खराब होने का मुख्य कारण...
भारत में हार्ट के वाल्व के खराब होने का मुख्य कारण रूमेटिक हार्ट डिजीज है। इस बीमारी में हार्ट के वाल्व में सिकुड़न तथा लीकेज शुरू हो जाता है। खून के लीकेज से पेशेंट का हार्ट फेल होने लगता है, जिसके कारण दम फूलना, शरीर में सूजन तथा छाती में दर्द व धड़कन अनियमित रहने लगती है। समय रहते इलाज और सर्जरी न कराने पर यह बीमारी घातक साबित हो सकती है।
प्रेग्नेंसी में यह बीमारी दो से चार गुना ज्यादा जानलेवा है, क्योंकि प्रेग्नेंसी में कार्डियक आउटपुट में लगभग 30 फीसदी की वृद्धि होती है। सर्जरी के वक्त कार्डियोपल्मोनरी बाईपास पर जाने के बाद प्रेग्नेंट पेशेंट में यूटेरोप्लेसेंटल इंसफिशिएंसी, फीटल हाइपरक्सिया, यूटराईन ब्लीडिंग, फिटल लॉस, मैटरनल मौरबिडिटी एवं मोर्टिलिटी काफी बढ़ जाती है। इसी कारण बाईपास के दौरान मां तथा बच्चे के लिए खतरा बढ़ जाता है।