भारतीय रेलवे ने ट्रेन संचालन को और सुरक्षित बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। अब ट्रेन चलाते समय यदि लोको पायलट एक निश्चित अवधि तक निष्क्रिय रहता है, तो इंजन में लगाया गया विजिलेंस स्विच डिवाइस सक्रिय होकर ट्रेन को अपने आप रोक देगा। यह प्रणाली पहले से मौजूद विजिलेंस मैकेनिज्म का उन्नत रूप है, जिसे जोधपुर के भगत की कोठी डीजल शेड के 166 इलेक्ट्रिक लोकोमोटिव में सफलतापूर्वक लागू किया जा चुका है।
आरडीएसओ के नए मानकों पर आधारित व्यवस्था
उत्तर पश्चिम रेलवे के वरिष्ठ मंडल यांत्रिक इंजीनियर (डीजल) राजकुमार शर्मा ने बताया कि यह नया सिस्टम रिसर्च डिजाइन एंड स्टैंडर्ड्स ऑर्गनाइजेशन (आरडीएसओ) की मोडिफिकेशन शीट एमएस-505 के अनुसार विकसित किया गया है। पुराने फुट ऑपरेटेड विजिलेंस स्विच (PVCd) को अब हैंड ऑपरेटेड पुश बटन (BPVG) से बदल दिया गया है। इससे लोको पायलट को बार-बार पैर से स्विच दबाने की जरूरत नहीं पड़ती और वह ड्राइविंग पर अधिक केंद्रित रह सकता है।
नए सिस्टम में यदि लोको पायलट एक मिनट (60 सेकंड) तक कोई गतिविधि नहीं करता, जैसे थ्रॉटल चलाना या विजिलेंस रिसेट बटन दबाना तो यह डिवाइस पहले दृश्य चेतावनी, फिर श्रव्य संकेत देता है। इसके बाद भी यदि कोई प्रतिक्रिया नहीं होती तो यह आपातकालीन ब्रेक सक्रिय कर देता है और ट्रेन अपने आप रुक जाती है।
अतिरिक्त बैकअप से बढ़ी सुरक्षा
नए सिस्टम में अतिरिक्त सुरक्षा के लिए एक बैकअप पुश बटन (BVPR) भी जोड़ा गया है, जिसका उपयोग जरूरत पड़ने पर विजिलेंस रिसेट करने के लिए किया जा सकता है। इससे न केवल सुरक्षा का स्तर बढ़ा है, बल्कि चालक दल की सतर्कता का प्रभावी परीक्षण भी सुनिश्चित हुआ है।
166 इंजनों में पूरा हुआ अपग्रेड
वरिष्ठ इंजीनियर राजकुमार शर्मा के अनुसार, जोधपुर के डीआरएम अनुराग त्रिपाठी के निर्देश पर कुल 169 इलेक्ट्रिक लोकोमोटिव में से 166 इंजनों में यह आधुनिक विजिलेंस सिस्टम लगाया जा चुका है। शेष लोकोमोटिव में भी जल्द ही यह व्यवस्था लागू की जाएगी। उन्होंने कहा कि यह पहल सुरक्षा और विश्वसनीयता के प्रति भगत की कोठी डीजल शेड की प्रतिबद्धता को दर्शाती है।
लोको पायलट की सतर्कता पर केंद्रित तकनीक
मंडल विद्युत इंजीनियर (रोलिंग स्टॉक) हर्षित कुमार सिंह ने बताया कि यह डिवाइस ट्रेन चलाने के दौरान लोको पायलट की सतर्कता को लगातार मॉनिटर करता है। जब तक पायलट थ्रॉटल या अन्य नियंत्रणों को संचालित करता रहता है, सिस्टम रिसेट होता रहता है। लेकिन जैसे ही गतिविधि रुकती है, चेतावनी और स्वचालित ब्रेक की प्रक्रिया शुरू हो जाती है।
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उन्होंने कहा कि यह तकनीक विशेष रूप से उन स्थितियों में उपयोगी है जब लोको पायलट की तबीयत अचानक बिगड़ जाए या वह बेहोश हो जाए। ऐसे में ट्रेन अपने आप रुक जाएगी और संभावित दुर्घटनाओं से बचाव संभव होगा।
सुरक्षा और आधुनिकता की दिशा में कदम
जोधपुर मंडल में विजिलेंस डिवाइस का यह उन्नत संस्करण न केवल तकनीकी नवाचार का उदाहरण है, बल्कि यात्रियों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने की दिशा में एक मजबूत कदम भी है। रेलवे का लक्ष्य है कि आने वाले समय में सभी इंजनों को इस अत्याधुनिक प्रणाली से लैस किया जाए।
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