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Jodhpur: देश में राजनीतिक उठापटक तो होगी, लेकिन अंत में स्थिरता बनी रहेगी, घांची की बिना सेटेलाइट भविष्यवाणी

Sat, 22 Apr 2023 08:25 PM IST
अरविंद कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जोधपुर

सार

एक समय था, जब देश के पास न तो सेटेलाइट थे और न ही मौसम विभाग था। लेकिन फिर भी मौसम की भविष्यवाणी हुआ करती थी और लोग आने वाले साल के बारे में भविष्यवाणी कर बताते थे कि इस बार बारिश होगी या नहीं।
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घांची की बिना सेटेलाइट भविष्यवाणी - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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आज हम आपको लिए चलते हैं राजस्थान के मारवाड़ में जहां जोधपुर में घांची समाज की ओर से धणी कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है, जिसमें धणी भविष्यवाणी करता है और आने वाले साल के बारे में बताता है।

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जोधपुर में सोजतिया बास घांची समाज के भवन में यज्ञ हुआ। बड़ी संख्या में बुजुर्ग, युवा और महिलाएं उस यज्ञ की ओर देख रहे थे। यज्ञ के पास ही अनाज की एक ढेरी पर डंडा लगाया गया और उसके मुंह पर दो बबूल की कांटे लगाए गए। कुछ ही दूरी पर दो युवक आमने-सामने बांस की दो लकड़ियां लेकर खड़े हुए, जिन पर लाल और काला निशान लगाया गया। दूसरी तरफ पंडित यज्ञ कर रहे थे और सामने बैठे समाज के वरिष्ठ व्यक्ति उस यज्ञ में आहुतियां देते नज़र आए। यहां घांची समाज का धणी कार्यक्रम हुआ।

इस कार्यक्रम का आयोजन 300 साल से ज़्यादा वक़्त से किया जा रहा है। यज्ञ के बीच-बीच में लोग जयकारे लगाते नज़र आए। एक बार तो दो बच्चे थक गए, फिर उनकी जगह दूसरे बच्चों को लाकर खड़ा किया गया। कहते हैं कि लाल लकड़ी सुखाल यानी अच्छी बारिश का संकेत देती है। वहीं, काली लकड़ी अकाल का संकेत करती है। लोग बताते हैं कि मंत्रों की ताकत के चलते दोनों लकड़ियां अपने आप ऊपर नीचे होना शुरू कर देती हैं। दोनों लकड़ियों में लंबे समय तक संघर्ष चलता रहा। कभी एक लकड़ी ऊपर जाती, तो कभी दूसरी। इस बीच लाल रंग की लकड़ी सुकाल का संकेत देते हुए ऊपर रही और अपने वर्चस्व का संकेत दिया। लेकिन कुछ देर बाद दोनों लकड़ियां बराबर आ गईं। इसी दौरान एक बच्चा जमीन पर गिर पड़ा। लोगों ने भगवान के जयकारे लगाने शुरू किए और कुछ देर बाद आरती शुरू हुई।
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लाल और काली लकड़ी में संघर्ष का मतलब देश में राजनीतिक उठापटक तो होगी...
घांची समाज के घनश्याम परिहार ने बताया कि भविष्यवाणी का यह धणी कार्यक्रम सालों से चला आ रहा है। आज धणी ने संकेत दिए हैं कि जिस तरह 2019 के बाद कोरोना आया और देश में एक नेगेटिव माहौल बना, ठीक उसी तरह बच्चे का गिरना एक अच्छा संकेत नहीं है। वहीं लाल और काली लकड़ी में संघर्ष होता रहा, इसका मतलब देश में राजनीतिक उठापटक तो होगी, लेकिन अंत में राजनीतिक स्थिरता बनी रहेगी। वहीं, मौसम के बारे में संकेत मिले हैं कि बारिश इस बार कम होगी, लेकिन अन्न का उत्पादन ठीक-ठाक रहेगा, जिससे आम व्यक्ति को कोई परेशानी नहीं होगी।

कौन है घांची समाज?
घांची समाज एक पशुपालक समाज है और बड़ी संख्या में लोग गाय पालते हैं। समाज के इस कार्यक्रम से वह यह अंदाजा लगा लेते हैं कि आने वाले समय में उन्हें चारे-पानी की व्यवस्था में क्या करना होगा? अगर बारिश कम होती है, तो समाज पहले से ही अपनी तैयारियां शुरू कर देता है। कार्यक्रम के अंत में सभी लोग धान की उस ढेरी से अन्न ले जाते हैं और उसे ले जाकर अपने घर में रखते हैं और इसे शुभ मानते हैं।

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