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Jodhpur: पूर्व महाराजा की जमीन पर फर्जीवाड़े का आरोप, पावर ऑफ अटॉर्नी के दुरुपयोग से रची गई कथित साजिश

Wed, 19 Aug 2026 06:42 PM IST
जोधपुर ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जोधपुर

सार

जोधपुर के पूर्व महाराजा गजसिंह की करोड़ों रुपये मूल्य की सैकड़ों बीघा जमीन हड़पने की कथित कोशिश का मामला सामने आया है। 2015 में अदालतों में पैरवी के लिए दिए मुखत्यारनामे का दुरुपयोग कर फर्जी बेचान इकरारनामे तैयार करने का आरोप है।
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जोधपुर के पूर्व महाराजा गजसिंह - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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जोधपुर के पूर्व महाराजा गजसिंह के नाम दर्ज करोड़ों रुपये मूल्य की सैकड़ों बीघा जमीन को हड़पने की कोशिश का मामला सामने आया है। आरोप है कि वर्ष 2015 में अदालतों में मुकदमों की पैरवी के लिए जारी आम मुखत्यारनामे का दुरुपयोग कर फर्जी बेचान इकरारनामे तैयार किए गए। पूर्व महाराजा के आम मुखत्यार डॉ. महेंद्र सिंह तंवर की शिकायत पर उदयमंदिर पुलिस थाने में 10 नामजद आरोपियों समेत अन्य के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है।

केवल अदालती पैरवी के लिए दिया गया था अधिकार

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शिकायत के अनुसार पूर्व महाराजा गजसिंह ने 15 अक्टूबर 2015 को नादड़ी निवासी दिवंगत दिलीप सिंह को आम मुखत्यार नियुक्त किया था। यह मुखत्यारनामा विभिन्न अदालतों में दीवानी, फौजदारी, राजस्व, ट्रिब्यूनल और आयकर मामलों की पैरवी के लिए दिया गया था। शिकायत में कहा गया है कि मुखत्यारनामे में स्पष्ट था कि अधिकार केवल अदालती और कानूनी कार्यवाही तक सीमित हैं। इसमें पूर्व महाराजा की किसी संपत्ति को बेचने या बेचान इकरारनामा करने का अधिकार नहीं दिया गया था। इसके बावजूद आरोप है कि आरोपियों ने मिलीभगत कर इस अधिकार का दुरुपयोग किया और पूर्व महाराजा की संपत्तियों से संबंधित फर्जी दस्तावेज तैयार किए।

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दस्तावेजों की जांच में सामने आया मामला

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शिकायत के मुताबिक, संपत्ति से जुड़े दस्तावेजों की समीक्षा के दौरान कथित फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ। आरोप है कि दिवंगत दिलीप सिंह के साथ मिलीभगत कर करीब 10 साल पुराने फर्जी बेचान इकरारनामे तैयार किए गए। दिलीप सिंह की मृत्यु के बाद कमल कंवर, उषा कंवर, कैलाश कंवर, प्रियंका कंवर, जेठाराम, भवानी सिंह, दमयंती, गणपतलाल, रविंद्र गौड़ और भरत कुमार ने इन अनरजिस्टर्ड दस्तावेजों पर मुद्रांक शुल्क जमा कराने के लिए उप-महानिरीक्षक, पंजीयन एवं मुद्रांक वृत्त पाली-जोधपुर के समक्ष आवेदन किया। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि दस्तावेजों के पंजीयन के बिना वर्षों बाद मुद्रांक शुल्क जमा कराने की कोशिश कथित फर्जी दस्तावेजों को वैध दिखाने की साजिश का हिस्सा थी।

सैकड़ों बीघा जमीन का उल्लेख

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एफआईआर में पाली जिले की सोजत तहसील और जोधपुर क्षेत्र में स्थित कई जमीनों का विवरण दिया गया है। इनमें सोजत तहसील के सरदार सम्मद स्थित खसरा नंबर 5 की 29 बीघा 3 बिस्वा जमीन और चंदलाई स्थित खसरा नंबर 513, 514 व 516 की कुल 22 बीघा 19 बिस्वा जमीन शामिल है। इसके अलावा चंदलाई और सरदार सम्मद के खसरा नंबर 518, 519, 520 तथा खसरा नंबर 9 से संबंधित 1039 बीघा जमीन का भी उल्लेख है। सोजत के सोबड़ावास में खसरा नंबर 35, 48 और 49 की कुल 3 बीघा 8 बिस्वा 8 बिस्वांशी जमीन तथा जोधपुर के ग्राम जोधपुर में खसरा नंबर 421, 421डी और 421ई की 4 बीघा 7 बिस्वा जमीन और खसरा नंबर 421ए व 421बी की 2 बीघा 8 बिस्वा जमीन भी मामले में शामिल बताई गई है। पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है और पूरे प्रकरण की जांच की जा रही है।

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