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Jhalawar News: नाबालिग का किया था शारीरिक शोषण, अब पोक्सो कोर्ट- वन ने सुनाई 20 साल की सजा

Fri, 16 Jan 2026 08:29 PM IST
झालावाड़ ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, झालावाड़

सार

Jhalawar News: झालावाड़ जिले में नाबालिग का शारीरिक शोषण करने वाले आरोपी को पोक्सो कोर्ट ने 20 साल की कठोर सजा सुनाई है। पुलिस में दर्ज रिपोर्ट के मुताबिक, आरोपी पीड़िता को पहले से जानता था और उसका पीड़िता के घर आना जाना लगा रहता था। 
 
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झालावाड़। पोस्को एक्ट में 20 साल की सजा 43 हजार का जुर्माना
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विस्तार
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झालावाड़: विशेष न्यायालय पोक्सो कोर्ट संख्या-1, झालावाड़ के विशेष न्यायाधीश ने नाबालिग का शारीरिक शोषण करने के प्रकरण में अभियुक्त बबलू को दोषी मानते हुए 20 वर्ष के कठोर कारावास एवं 43 हजार रुपये के अर्थदण्ड से दण्डित किया है।
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पीड़िता के घर आता जाता था आरोपी
विशिष्ट लोक अभियोजक गिरिराज नागर ने बताया कि 10 अक्टूबर 2025 को फरियादी ने अपनी नाबालिग पुत्री के साथ थाना मनोहरथाना में रिपोर्ट दर्ज कराई। रिपोर्ट में बताया गया कि लगभग 7-8 माह पूर्व पीड़िता के पिता ने अभियुक्त की सगाई पीड़िता की बुआ की पोती से करवाई थी, जिसके बाद अभियुक्त का पीड़िता के घर आना-जाना हो गया।

12 अक्टूबर 2024 की है घटना
घटना अक्टूबर 2024 की है, जब पीड़िता अपने माता-पिता के साथ खेत पर मक्का छिलने गई थी। शाम करीब 4 बजे पीड़िता के पिता ने उसे बकरी लेकर घर भेज दिया। लगभग आधे घंटे बाद जब पिता घर पहुंचे तो घर की कुंडी अंदर से बंद मिली। कुंडी खुलवाने पर पीड़िता ने दरवाजा खोला, उस समय अभियुक्त भी घर के अंदर मौजूद था। पूछताछ करने पर पीड़िता ने बताया कि अभियुक्त उसके साथ छेड़छाड़ कर रहा था और गलत काम करने की धमकी दे रहा था। इसके बाद पीड़िता ने अपने पिता को बताया कि 2 सितंबर 2024 को जब वह खेत से बकरी लेकर घर लौट रही थी, तब अभियुक्त ने उसे रास्ते में पकड़कर खाल में ले जाकर उसके साथ जबरन गलत काम किया और किसी को बताने पर जान से मारने की धमकी दी। 
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पीड़िता को लगातार देता था धमकी

डर के कारण पीड़िता ने यह बात पहले किसी को नहीं बताई। इसके बाद अभियुक्त लगातार पीड़िता को परेशान करता रहा और कई बार उसके साथ जबरन गलत काम किया। इस रिपोर्ट के आधार पर पुलिस ने प्रकरण दर्ज कर अनुसंधान पूर्ण कर न्यायालय में चालान प्रस्तुत किया। अभियोजन की ओर से राजस्थान सरकार की तरफ से पैरवी करते हुए 11 गवाह एवं 22 दस्तावेज न्यायालय में प्रस्तुत किए गए। प्रकरण में प्रस्तुत साक्ष्यों के आधार पर न्यायालय ने अभियुक्त को दोषी मानते हुए उसे 20 वर्ष के कठोर कारावास तथा कुल 43 हजार रुपए के अर्थदण्ड से दण्डित किया। 
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