जिले के पचपहाड़ स्थित सरकारी महात्मा गांधी स्कूल के छात्रों द्वारा खोजे गए क्षुद्रग्रह 2021 DB5 का नाम अब पिपलौदी हादसे में दिवंगत हुए सात मासूम बच्चों की स्मृति में रखा जाएगा। IASC–NASA एस्टेरॉयड सर्च कैंपेन में भाग लेने वाले छात्रों ने लिखित रूप में यह सहमति जताई है और नासा ने इस प्रस्ताव पर मुहर लगाते हुए क्षुद्रग्रह को स्थायी नंबर भी आवंटित कर दिया है।
लेक्चरर और राज्य स्तरीय सम्मान प्राप्त शिक्षक डॉ. दिव्येंदु सेन ने बताया कि छात्रों ने इस क्षुद्रग्रह का नाम ‘प्रमिश्का’ सुझाया है, जो पिपलौदी हादसे में गुजरे सात बच्चों पायल (13), प्रियंका (12), मीना (12), हरीश (11), कुंदन (10), कान्हा (7) और सतीश (8) के नामों के शुरुआती अक्षरों से मिलकर बनाया गया है। यह नाम अब लाखों वर्षों तक सूर्य की परिक्रमा करते हुए सौर मंडल में अमर रहेगा।
2025 के पिपलौदी हादसे की दर्दनाक याद
गौरतलब है कि जुलाई 2025 में जिले के पिपलौदी गांव में भारी बारिश के दौरान स्कूल भवन की छत गिरने से सात बच्चों की मौत हो गई थी, जबकि 27 अन्य गंभीर रूप से घायल हुए थे। इस हादसे ने पूरे जिले को हिलाकर रख दिया था। अब इन बच्चों की याद हमारी धरती से कहीं आगे अंतरिक्ष में भी अंकित होने जा रही है।
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छात्रों ने खोजे थे चार क्षुद्रग्रह
डॉ. सेन के मार्गदर्शन में राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, उन्हेल के छात्रों सुगंधा कुमारी, कोमल कुंवर, हर्षिता डांगी और संजय कुमार ने वर्ष 2020–21 में IASC–NASA कार्यक्रम के दौरान चार क्षुद्रग्रह खोजे थे। दिसंबर 2025 में इंटरनेशनल एस्ट्रोनॉमिकल सर्च कोलैबोरेशन (IASC) से प्राप्त पुष्टि में बताया गया कि ये चारों क्षुद्रग्रह सूर्य की एक परिक्रमा पूरी कर चुके हैं, इनमें से तीन को इंटरनेशनल एस्ट्रोनॉमिकल यूनियन (IAU) द्वारा स्थायी नंबर मिल चुके हैं जबकि एक क्षुद्रग्रह संबंधित सर्वेक्षण संस्था के लिए सुरक्षित रखा गया है। तीन क्षुद्रग्रह नामकरण के लिए पात्र घोषित किए गए हैं।
इन क्षुद्र ग्रहों की खोज करने वाले छात्रों ने अब उच्च शिक्षा में प्रवेश ले लिया है लेकिन उनकी वैज्ञानिक उपलब्धियां अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त कर रही हैं। शिक्षक डॉ. दिव्येंदु सेन ने कहा कि छात्र चाहते थे कि विज्ञान समाज के प्रति संवेदनशील रहे। उन्होंने कहा कि हम नहीं चाहते थे कि यह केवल एक वैज्ञानिक उपलब्धि बनकर रह जाए। हम चाहते हैं कि उन बच्चों की स्मृति सूर्य के साथ हमेशा परिक्रमा करती रहे। यह खगोल विज्ञान के साथ-साथ प्रेम और करुणा का प्रतीक है। उन्होंने बताया कि IAU द्वारा स्वीकृत होने के बाद क्षुद्रग्रह का नाम हमेशा के लिए वैज्ञानिक साहित्य का हिस्सा बन जाता है।
शिक्षा विभाग ने की सराहना
मुख्य जिला शिक्षा अधिकारी रामसिंह मीणा ने कहा कि दिवंगत बच्चों की स्मृति में क्षुद्रग्रह का नाम रखा जाना उन्हें एक सच्ची श्रद्धांजलि है। उन्होंने कहा कि यह प्रेरणादायक उदाहरण है कि सरकारी स्कूलों के छात्र भी वैश्विक वैज्ञानिक कार्यक्रमों में अपनी पहचान बना सकते हैं। यह जिले के लिए गर्व की बात है।