881 संपन्न किसान उठा रहे थे गरीबों का गेहूं (सांकेतिक तस्वीर)
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झालावाड़ जिले में खाद्य सुरक्षा योजना के दुरुपयोग का बड़ा मामला सामने आया है। जनाधार और समर्थन मूल्य के डेटा के क्रॉस वेरिफिकेशन में यह खुलासा हुआ कि जिले के कुल 881 संपन्न किसान गरीबों के हिस्से का गेहूं उठा रहे थे। जांच के मुताबिक ये किसान रबी विपणन वर्ष 2024–25 में सरकारी कांटे पर 100 क्विंटल से अधिक गेहूं बेच चुके हैं, लेकिन इसके बावजूद बीपीएल श्रेणी में रहते हुए खाद्य सुरक्षा योजना का गेहूं लेते रहे। रसद विभाग के अनुसार यह नियमों का स्पष्ट उल्लंघन है।
सबसे अधिक मामले पिड़ावा और डग ब्लॉक में पाए गए हैं। विभाग ने बताया कि जल्द ही इन अपात्र किसानों की सूची सार्वजनिक रूप से जारी की जाएगी। रसद विभाग द्वारा जनाधार और आधार संबंधी डेटा के साथ न्यूनतम समर्थन मूल्य पर किए गए गेहूं बिक्री के मिलान में कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं।
जिला रसद अधिकारी देवराज रवि ने कहा कि विभाग सख्त रुख में है और ऐसे सभी अपात्र किसानों को नोटिस भेजने की कार्रवाई जारी है। उन्होंने बताया कि इन लोगों को स्वेच्छा से खाद्य सुरक्षा सूची से नाम हटवाने का अवसर दिया जा रहा है। पिड़ावा और डग ब्लॉक विशेष रूप से विभाग की निगरानी में हैं।
प्रवर्तन अधिकारी गोविंद दान देथा ने बताया कि तकनीकी विश्लेषण में सबसे अधिक अपात्र लाभार्थी पिड़ावा और डग ब्लॉक में मिले हैं। सभी 881 किसानों की ब्लॉक-वार सूची तैयार कर ली गई है और संबंधित तहसीलदारों तथा डीलरों को नोटिस तामील करवाने के लिए भेज दी गई है।
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31 दिसंबर तक अंतिम मौका, बाद में होगी वसूली
जिला रसद अधिकारी ने चेतावनी दी कि चिन्हित परिवारों को 31 दिसंबर 2025 तक ई-मित्र या तहसील कार्यालय के माध्यम से ‘गिव-अप’ करते हुए अपना नाम एनएफएसए सूची से हटवाना होगा। तय समय तक नाम नहीं हटवाया गया तो 1 जनवरी 2026 से उन्हें स्वतः अपात्र घोषित कर दिया जाएगा। अब तक उठाए गए गेहूं की बाजार दर 27 रुपये प्रति किलोग्राम के हिसाब से भू-राजस्व की तरह वसूली की जाएगी तथा ब्लैकलिस्ट करने की अनुशंसा भी की जाएगी।
ब्लॉकवार अपात्र किसानों की संख्या
पिड़ावा – 283
डग – 185
भवानीमंडी – 135
झालरापाटन – 76
मनोहरथाना – 53
बकानी – 21
खानपुर – 20
अकलेरा – 11