राजस्थान उच्च न्यायालय ने भरतपुर और धौलपुर के जाटों को केन्द्र की सरकारी नौकरियों के बाद अब राज्य की सरकारी नौकरियों से भी बाहर कर दिया है।
न्यायालय ने ओबीसी आयोग को सभी ओबीसी जातियों को लेकर फिर से समीक्षा करने को कहा है। न्यायालय ने यह भी कहा है कि आयोग चार महीने में रिपोर्ट बनाकर तय करे कि किसे आरक्षण की जरूरत है और किसे नहीं।
राजस्थान उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश सुनील अंबवानी की खंडपीठ ने सोमवार को यह फैसला दिया। डेढ़ दशक से भी अधिक समय से चल रहे जाट आरक्षण मामले की सुनवाई एक महीने से लगातार चल रही थी।