जालौर में एक 6 साल की मासूम बच्ची से उसके चचरे चाचा द्वारा किए गए दुष्कर्म के मामले ने समाज को झकझोर कर रख दिया है। इस जघन्य अपराध के लिए पॉक्सो कोर्ट ने आरोपी को अंतिम सांस तक जेल में रहने की सजा सुनाई है। यह घटना 26 जनवरी 2025 को हुई थी, जब आरोपी ने बच्ची को बेर खिलाने के बहाने खेत में ले जाकर उसके साथ दरिंदगी की थी। पीड़िता की मां की शिकायत पर पुलिस ने त्वरित कार्रवाई की और कोर्ट में पेश किए गए सबूतों के आधार पर आरोपी को आजीवन कारावास की सजा दी गई।
मासूम के साथ दरिंदगी
जानकारी के मुताबिक, यह दिल दहलाने वाली घटना जालोर के भीनमाल थाना क्षेत्र में 26 जनवरी 2025 की शाम को हुई। पीड़िता की मां ने बताया कि वह अपने सात बच्चों के साथ रहती है, जबकि उसका पति दूसरे राज्य में मजदूरी करता है। उस दिन उसकी 6 और 8 साल की दो बेटियां घर के बाहर खेल रही थीं। इसी दौरान मां का चचेरा देवर दोनों बच्चियों को बेर खिलाने के बहाने खेत में ले गया। उसने बड़ी बहन को एक पेड़ के नीचे खड़ा कर दिया और 6 साल की छोटी बच्ची को कुछ दूर ले जाकर उसे कुछ पैसे दिए। इसके बाद उसने मासूम बच्ची से दुष्कर्म किया। बच्ची के चीखने की आवाज सुनकर बड़ी बहन वहां पहुंची, लेकिन आरोपी ने दोनों बहनों को धमकाकर घर भेज दिया।
मासूम की आपबीती सुन मां को लगा सदमा
जब बच्चियां घर पहुंचीं, तो छोटी बच्ची के प्राइवेट पार्ट से खून निकल रहा था और उसके पेंट पर भी खून के धब्बे थे। यह देखकर मां घबरा गई और उसने बच्ची से पूछताछ की। मासूम ने रोते हुए अपनी मां को सारी आपबीती बताई, जिसने परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया। मां ने तुरंत इसकी जानकारी आसपास के लोगों को दी और अगले दिन 27 जनवरी को वह भीनमाल थाने पहुंची। वहां उसने लिखित शिकायत दर्ज कराई। शिकायत में उसने बताया कि जब उसने आरोपी से इस मामले में पूछताछ की, तो उसने उसके साथ मारपीट की। इस घटना ने परिवार को मानसिक और भावनात्मक रूप से तोड़ दिया।
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पुलिस की कार्रवाई और मेडिकल जांच
पीड़िता की मां की शिकायत पर भीनमाल पुलिस ने तत्काल कार्रवाई शुरू की। 27 जनवरी को मामला दर्ज किया गया और बच्ची का मेडिकल परीक्षण कराया गया। मेडिकल जांच में दुष्कर्म की पुष्टि हुई, जिसके बाद पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने मामले की गहन जांच की और कोर्ट में आरोप पत्र पेश किया। विशिष्ट लोक अभियोजक रणजीत सिंह राजपुरोहित ने बताया कि जांच के दौरान सभी सबूत और गवाहों के बयान जुटाए गए, जो आरोपी के खिलाफ मजबूत सबूत बने। पुलिस की इस त्वरित कार्रवाई ने मामले को कोर्ट तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
पॉक्सो कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला
पॉक्सो कोर्ट के विशिष्ट न्यायाधीश प्रमोद कुमार मलिक ने इस मामले की सुनवाई के दौरान गवाहों के बयान और पेश किए गए सबूतों का बारीकी से अध्ययन किया। पीड़िता की मां, बड़ी बहन और मेडिकल रिपोर्ट्स के आधार पर कोर्ट ने आरोपी को दोषी ठहराया। न्यायाधीश ने इस जघन्य अपराध की गंभीरता को देखते हुए आरोपी को अंतिम सांस तक जेल में रहने की सजा सुनाई, जो आजीवन कारावास के समान है।
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