जालौर फैमिली कोर्ट ने पूर्व भाजपा विधायक अमृता मेघवाल और भाजपा एससी मोर्चा जिलाध्यक्ष बाबूलाल मेघवाल के करीब तीन साल पुराने तलाक मामले में महत्वपूर्ण आदेश दिया है। कोर्ट ने अमृता मेघवाल के आवेदन को स्वीकार करते हुए वर्ष 2023 में जारी एकतरफा तलाक की डिक्री निरस्त कर दी। अदालत ने माना कि तलाक की कार्रवाई के दौरान अमृता को विधि के अनुसार नोटिस की तामील नहीं हुई और उन्हें अपना पक्ष रखने का उचित अवसर नहीं मिला। अब मामले की दोबारा सुनवाई होगी और दोनों पक्षों को अपना पक्ष रखने का मौका मिलेगा।
2022 में दायर हुई थी तलाक की याचिका
बाबूलाल मेघवाल ने हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 13 के तहत विवाह विच्छेद के लिए 22 सितंबर 2022 को जालौर फैमिली कोर्ट में याचिका दायर की थी। अमृता मेघवाल को जयपुर स्थित उनके पुराने पते पर नोटिस भेजे गए थे। बताया गया कि मकान लंबे समय से बंद होने के कारण रजिस्टर्ड डाक से भेजे गए नोटिस वापस लौट आए। इसके बाद समाचार पत्र में नोटिस प्रकाशित करवाकर तामील की कार्रवाई की गई और अमृता की गैरमौजूदगी में मामले में एकतरफा कार्रवाई आगे बढ़ी।
नोटिस की तामील को कोर्ट ने माना अपर्याप्त
मामले की जानकारी मिलने के बाद अमृता मेघवाल ने 13 जून 2023 को प्रकरण की नकल के लिए आवेदन किया। इसके बाद 5 जुलाई 2023 को उन्होंने एकतरफा डिक्री निरस्त करने के लिए आवेदन प्रस्तुत किया। रिकॉर्ड की जांच में कोर्ट ने पाया कि जिस पते पर नोटिस भेजा गया था, वहां मकान बंद था और रजिस्टर्ड डाक भी मकान बंद होने की टिप्पणी के साथ वापस लौटी थी। ऐसे में अदालत ने परिस्थितियों को देखते हुए समाचार पत्र में प्रकाशित नोटिस को पर्याप्त तामील नहीं माना।
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एकतरफा कार्रवाई और डिक्री निरस्त
फैमिली कोर्ट के पीठासीन अधिकारी अमर वर्मा ने अमृता मेघवाल का आवेदन स्वीकार करते हुए 4 मई 2023 की एकतरफा कार्रवाई तथा 7 जून 2023 को पारित निर्णय और डिक्री को निरस्त कर दिया। कोर्ट ने प्रकरण को दोबारा दर्ज कर आगे सुनवाई करने के निर्देश दिए हैं। मामले में अमृता मेघवाल की ओर से अधिवक्ता संजय बोराणा और बाबूलाल मेघवाल की ओर से अधिवक्ता सुरेंद्र कुमार दवे ने पैरवी की।
दोनों पक्षों ने दी अपनी प्रतिक्रिया
आदेश के बाद अमृता मेघवाल ने कहा कि उनके अनुसार कोर्ट के सामने तथ्यों को सही तरीके से प्रस्तुत नहीं किया गया था, जिसके आधार पर पूर्व में फैसला हुआ। वहीं बाबूलाल मेघवाल ने कहा कि यह अंतिम फैसला नहीं है और कानूनी प्रक्रिया के तहत आगे की कार्रवाई होगी। उन्होंने कहा कि अब अमृता को अपना पक्ष रखने का अवसर दिया जाएगा।
2008 में हुई थी शादी
अमृता मेघवाल और बाबूलाल मेघवाल की शादी 21 अप्रैल 2008 को हुई थी। दोनों 21 जनवरी 2019 से अलग रह रहे थे। इसके करीब तीन साल बाद बाबूलाल मेघवाल ने तलाक के लिए अदालत में याचिका दायर की थी।
अब एकतरफा तलाक की डिक्री निरस्त होने के बाद मामले की नए सिरे से सुनवाई होगी। अदालत दोनों पक्षों को अपना पक्ष रखने का अवसर देगी और इसके बाद मामले में आगे निर्णय लिया जाएगा।