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Jalore News: पेपर लीक प्रकरणों में नकल गिरोह से जुड़े पांच शिक्षक बर्खास्त, चार पहले से ही पुलिस हिरासत में

Sun, 18 May 2025 08:49 AM IST
जालौर ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जालौर

सार

जिले में पेपर लीक और नकल गिरोह से जुड़े पांच शिक्षकों को प्रारंभिक शिक्षा विभाग, जालौर ने बर्खास्त कर दिया है। इन सभी पर विभिन्न परीक्षाओं में नकल और फर्जीवाड़ा करने जैसे आरोप लगाए गए हैं।
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नकल गिरोह से जुड़े पांच शिक्षक बर्खास्त
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विस्तार
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प्रारंभिक शिक्षा विभाग, जालौर ने पेपर लीक और नकल गिरोह से जुड़े पांच शिक्षकों को बर्खास्त कर बड़ी कार्रवाई की है। यह आदेश जिला शिक्षा अधिकारी (प्रारंभिक) मुनेश कुमार मीणा द्वारा 2 मई को जारी किए गए। बर्खास्त किए गए शिक्षकों में से चार को एसओजी और पुलिस द्वारा गिरफ्तार किया जा चुका है, जबकि एक शिक्षक अभी फरार है। सभी आरोपी शिक्षकों पर विभिन्न भर्ती परीक्षाओं में नकल, फर्जीवाड़ा और डमी अभ्यर्थियों से परीक्षा दिलवाने जैसे गंभीर आरोप हैं।

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बर्खास्त किए गए शिक्षकों में शामिल सुनील कुमार बेनीवाल को राजस्थान में ब्लूटूथ से नकल कराने वाले गिरोह का मास्टरमाइंड माना जाता है। वर्ष 2012 में तृतीय श्रेणी शिक्षक पद पर नियुक्त सुनील रा.प्रा.वि. बाटा का गोलिया विरावां, जालौर में पदस्थापित था। उसकी पत्नी ग्राम पंचायत की पूर्व सरपंच रह चुकी है, जबकि पंचायत का संचालन स्वयं सुनील करता था।

वह कनिष्ठ लेखाकार भर्ती परीक्षा 2013 और वरिष्ठ अध्यापक भर्ती परीक्षा 2016 में ब्लूटूथ डिवाइस के जरिए नकल करवाने और डमी अभ्यर्थियों के जरिए परीक्षा दिलवाने में मुख्य आरोपी रहा है। राजसमंद, उदयपुर और जोधपुर में इस संबंध में मुकदमे दर्ज हैं। एसओजी ने 25 हजार रुपये के इनामी सुनील को 2 जुलाई 2024 को हैदराबाद से गिरफ्तार किया था। खुलासा हुआ कि उसने अपनी साली राजेश्वरी विश्नोई को एसआई भर्ती 2021 की परीक्षा में सॉल्व्ड पेपर पढ़ाया था, जिससे वह मेरिट में चयनित हुई थी।
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दूसरे आरोपी वर्ष 2013 में गणपतराम की नियुक्ति सांचौर के कारोला स्थित रा.प्रा.वि. माताजी मंदिर में हुई थी। उसके भाई श्रीराम गोदारा उस समय जिला शिक्षा अधिकारी थे, जिससे उसे लंबे समय तक संरक्षण मिला। भाई के एपीओ होते ही गणपत की गिरफ्तारी और बर्खास्तगी की प्रक्रिया शुरू हुई। एसओजी जांच में पता चला कि गणपत ने प्राध्यापक भर्ती परीक्षा 2022 के लिए फर्जी डिग्री प्रस्तुत की थी, जो मेवाड़ विश्वविद्यालय से जांच में फर्जी पाई गई। उसे 21 मार्च 2024 को गिरफ्तार किया गया।

राजीव विश्नोई, जो कि तीसरा बर्खास्त शिक्षक है, रा.उ.प्रा.वि. पालड़ी देवडान में कार्यरत था और पेपर लीक गैंग का सक्रिय सदस्य भी रहा था। वर्ष 2022 में आयोजित सेकंड ग्रेड भर्ती परीक्षा से पहले उसने अपने साथियों के साथ मिलकर हिन्दी और सामान्य ज्ञान के सॉल्व्ड पेपर तैयार कर बस में 42 अभ्यर्थियों को पढ़ाया था। राजीव पर सांगानेर थाने में केस दर्ज हैं। जेईएन भर्ती 2020 और एसआई भर्ती प्रकरणों में भी वह वांछित था। एसओजी ने 11 जुलाई 2024 को उसे गिरफ्तार किया था।

चौथे आरोपी शिक्षक अरविंद विश्नोई की नियुक्ति 28 अगस्त 2023 को हुई थी और 30 सितंबर को उसने पदभार ग्रहण किया था। जांच में खुलासा हुआ कि 25 फरवरी 2023 को आयोजित तृतीय श्रेणी शिक्षक भर्ती परीक्षा 2022 में उसने अपनी जगह डमी अभ्यर्थी से परीक्षा दिलवाई थी। धोखाधड़ी का खुलासा होते ही उसे बर्खास्त कर दिया गया।
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एक अन्य शिक्षक दलपतसिंह की नियुक्ति 20 जुलाई 2019 को वाडा भाडवी स्थित चांदाजी का धोरा रा.उ.प्रा.वि. में हुई थी। वर्ष 2012 की भर्ती परीक्षा में उसने अपनी बहन कमला की जगह डमी अभ्यर्थी को बैठाया था। इस मामले में सांगानेर थाने में केस दर्ज है और एसओजी ने उसे 6 अप्रैल को गिरफ्तार किया था। उसने बीएमओयू की डिग्री भी परीक्षा के बाद प्राप्त की गई थी, जो नियमविरुद्ध थी। विभाग को गिरफ्तारी की सूचना नहीं देने और संतोषजनक जवाब न देने पर नोटिस जारी कर उसे भी बर्खास्त किया गया।

 

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